समांतर रेखाएँ और तिर्यक रेखा (Parallel Lines and a Transversal)
🎯 इस पाठ के अंत में तुम क्या सीखोगे?
👉 समांतर रेखाओं की परिभाषा और विशेषताएँ समझना।
👉 तिर्यक रेखा, संगत कोण, एकांतर अंतः कोण और एक ही ओर के अंतः कोणों को पहचानना।
👉 समांतर रेखाओं के एकांतर अंतः कोण बराबर होने का प्रमाण समझना।
👉 समांतर रेखाओं के बीच एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° सिद्ध करना।
एक ही समतल में स्थित दो अलग-अलग सरल रेखाएँ, जिन्हें दोनों दिशाओं में कितना भी बढ़ाया जाए और वे कभी एक-दूसरे को न काटें, समांतर रेखाएँ (Parallel Lines) कहलाती हैं।
यदि AB और CD समांतर हों, तो हम AB ∥ CD लिखते हैं।
एक समांतर रेखा के किसी भी बिंदु से दूसरी रेखा पर खींचे गए लंब की लंबाई हर स्थान पर समान होती है। यही लंबवत लंबाई दोनों रेखाओं के बीच की दूरी है।
👉 तिर्यक रेखा (Transversal)
एक ही समतल में दो या अधिक अन्य रेखाओं को अलग-अलग बिंदुओं पर काटने वाली सरल रेखा को तिर्यक रेखा कहते हैं। जिन रेखाओं को वह काटती है, उनका समांतर होना आवश्यक नहीं है।
तिर्यक रेखा का तिरछा होना आवश्यक नहीं है। वह रेखाओं पर लंब भी हो सकती है। यदि कोई तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं में से एक पर लंब हो, तो दूसरी पर भी लंब होगी।
समांतर रेखाएँ
AB ∥ CD
समांतर रेखाओं को काटती तिर्यक रेखा
AB ∥ CD; MN तिर्यक रेखा है।
आगे के चित्रों में AB ∥ CD है। तिर्यक रेखा MN, AB को O पर और CD को P पर काटती है। तिर्यक रेखा पर M, O, P और N इसी क्रम में हैं। A और B, O के विपरीत ओर हैं तथा C और D, P के विपरीत ओर हैं। कोणों के नाम इन्हीं चिह्नित चित्रों के अनुसार दिए गए हैं।
👉 संगत कोण (Corresponding Angles)
जब एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को काटती है, तो दोनों प्रतिच्छेदों पर समान सापेक्ष स्थिति वाले कोण संगत कोण कहलाते हैं। वे तिर्यक रेखा के एक ही ओर होते हैं; एक अंतः कोण और दूसरा बाह्य कोण होता है।
यदि दोनों रेखाएँ समांतर हों, तो संगत कोण बराबर होते हैं। आगे के प्रमाणों में हम समांतर रेखाओं के इसी मानक गुण का उपयोग करेंगे।
संगत कोण (Corresponding Angles)
∠MOB और ∠OPD संगत कोण हैं।
AB ∥ CD होने से ∠MOB = ∠OPD।
एक ही रंग से चिह्नित कोण संगत युग्म दर्शाते हैं।
👉 एकांतर अंतः कोण (Alternate Interior Angles)
दो रेखाओं के बीच, तिर्यक रेखा के विपरीत ओर और अलग-अलग प्रतिच्छेदों पर स्थित कोणों को एकांतर अंतः कोण कहते हैं।
यदि दोनों रेखाएँ समांतर हों, तो एकांतर अंतः कोण बराबर होते हैं। “एकांतर कोण” में एकांतर बाह्य कोण भी शामिल हो सकते हैं। इस पाठ में हम अंतः कोणों के युग्मों पर ध्यान देंगे।
एकांतर अंतः कोण (Alternate Interior Angles)
∠AOP और ∠DPO एकांतर अंतः कोणों का एक युग्म हैं।
∠BOP और ∠CPO एकांतर अंतः कोणों का दूसरा युग्म हैं।
AB ∥ CD होने से ∠AOP = ∠DPO तथा ∠BOP = ∠CPO।
| संगत कोण; AB ∥ CD | ∠MOB = ∠OPD। |
| O पर शीर्षाभिमुख कोण | ∠MOB = ∠AOP। |
| अतः | ∠AOP = ∠OPD = ∠DPO। |
| दूसरे युग्म के लिए, संगत कोण | ∠MOA = ∠OPC। |
| O पर शीर्षाभिमुख कोण | ∠MOA = ∠BOP। |
| अतः | ∠BOP = ∠OPC = ∠CPO। |
👉 तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण (Co-interior Angles)
दो रेखाओं के बीच, तिर्यक रेखा के एक ही ओर और अलग-अलग प्रतिच्छेदों पर स्थित कोण एक ही ओर के अंतः कोण कहलाते हैं।
यदि दोनों रेखाएँ समांतर हों, तो ऐसे प्रत्येक युग्म का योग 180° होता है। अर्थात दोनों कोण संपूरक होते हैं। यह बात किन्हीं भी दो अंतः कोणों के लिए नहीं कही जा सकती।
तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण (Co-interior Angles)
∠BOP + ∠OPD = 180°; ∠CPO + ∠AOP = 180°।
एक ही रंग के कोण तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों के युग्म हैं। AB ∥ CD होने के कारण प्रत्येक युग्म के कोण संपूरक हैं।
| संगत कोण; AB ∥ CD | ∠MOB = ∠OPD। |
| OM और OP विपरीत किरणें हैं; रैखिक युग्म | ∠MOB + ∠BOP = 180°। |
| ∠MOB के स्थान पर ∠OPD रखने पर | ∠OPD + ∠BOP = 180°। |
| दूसरे युग्म के लिए, संगत कोण | ∠MOA = ∠CPO। |
| O पर रैखिक युग्म | ∠MOA + ∠AOP = 180°। |
| ∠MOA के स्थान पर ∠CPO रखने पर | ∠CPO + ∠AOP = 180°। |
✍ सरल हल किए गए उदाहरण
✏️ उदाहरण 1: संगत कोण
एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को काटती है। यदि एक कोण 65° है, तो उसका संगत कोण कितना होगा?
हल: समांतर रेखाओं के संगत कोण बराबर होते हैं। इसलिए संगत कोण का माप 65° है।
✏️ उदाहरण 2: एकांतर अंतः कोण
एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को काटती है और बना हुआ एक अंतः कोण 110° है। उसका एकांतर अंतः कोण कितना होगा?
हल: समांतर रेखाओं के एकांतर अंतः कोण बराबर होते हैं। इसलिए अभीष्ट कोण का माप 110° है।
✏️ उदाहरण 3: एक ही ओर के अंतः कोण
दो समांतर रेखाओं के बीच तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों में से एक 72° है। दूसरा कोण ज्ञात करो।
हल: दोनों कोणों का योग 180° होता है। इसलिए दूसरा कोण = 180° − 72° = 108°।
⚠️ याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
🔹 संगत और एकांतर अंतः कोणों को उनकी स्थिति से पहचाना जाता है। रेखाएँ समांतर होने पर उनकी समानता सुनिश्चित होती है।
🔹 तिर्यक रेखा दूसरी रेखाओं को अलग-अलग बिंदुओं पर काटती है। उसका तिरछा होना आवश्यक नहीं है।
🔹 अंतः कोणों के हर युग्म का योग 180° नहीं होता। यहाँ संपूरक होने का नियम समांतर रेखाओं के बीच एक ही ओर के अंतः कोणों के लिए है।
🧠 त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
🔹 समांतर रेखाएँ अलग-अलग होती हैं, एक ही समतल में होती हैं और कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
🔹 उनके बीच की लंबवत दूरी हर स्थान पर समान होती है।
🔹 जब एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को काटती है:
⭐ संगत कोण बराबर होते हैं।
⭐ एकांतर अंतः कोण बराबर होते हैं।
⭐ एक ही ओर के अंतः कोणों के प्रत्येक युग्म का योग 180° होता है।