त्रिकोणमितीय अनुपात Trigonometrical Ratios
त्रिभुज के तीन कोणों, तीन भुजाओं और उनके पारस्परिक संबंधों का अध्ययन त्रिकोणमिति का एक प्रमुख भाग है। इन संबंधों को समझने के लिए त्रिकोणमितीय अनुपातों की परिभाषा दी जाती है।
इस पाठ में हम धनात्मक न्यूनकोण के छह त्रिकोणमितीय अनुपातों और उनके पारस्परिक संबंधों को सरल रूप में सीखेंगे।
त्रिकोणमितीय अनुपात की अवधारणा
🔹 त्रिकोणमितीय अनुपात
मान लो, OB एक ऐसी किरण जो अपने प्रारंभिक बिंदु को स्थिर रखकर चारों ओर घूम सकती है। है। यह O को केंद्र मानकर वामावर्त (Anticlockwise) दिशा में घूमते हुए OA स्थिति से OB स्थिति तक पहुँची। इससे ∠AOB बना।
मान लें, ∠AOB = θ और θ एक न्यूनकोण है।
θ एक ग्रीक अक्षर है, इसका उच्चारण “थीटा” (Theta) होता है।अब OB किरण पर कोई बिंदु P लें। P से OA पर PM लंब खींचें। तब △POM एक समकोण त्रिभुज होगा।
△POM में OP कर्ण, θ के सामने वाली भुजा PM लंब और θ से लगी हुई भुजा OM आधार कहलाती है।
सरल रूप में:
कर्ण (Hypotenuse) = OP = h
लंब (Perpendicular) = PM = p
आधार (Base) = OM = b
त्रिकोणमितीय अनुपातों का परिचय
समकोण त्रिभुज में θ के सापेक्ष लंब और कर्ण के अनुपात को sin θ कहते हैं।
अर्थात,
∴ sin θ =
इसी प्रकार बाकी पाँच अनुपातों को भी समझा जा सकता है।
छह त्रिकोणमितीय अनुपात हैं:
| sin θ = ---- (i) | cosec θ = ---- (iv) |
| cos θ = ---- (ii) | sec θ = ---- (v) |
| tan θ = ---- (iii) | cot θ = ---- (vi) |
💡 याद रखने का आसान तरीका
पहले तीन अनुपात याद रखने के लिए एक सरल और प्रचलित mnemonic है:
Some People Have Curly Brown Hair Turn Permanently Black🔹 Some People Have → sin θ =
🔹 Curly Brown Hair → cos θ =
🔹 Turn Permanently Black → tan θ =
इसके बाद बाकी तीन अनुपात आसानी से मिल जाते हैं, क्योंकि वे पहले तीन के व्युत्क्रम अनुपात हैं।
🔹 sin θ का व्युत्क्रम → cosec θ =
🔹 cos θ का व्युत्क्रम → sec θ =
🔹 tan θ का व्युत्क्रम → cot θ =
व्युत्क्रम संबंध (Reciprocal Relations)
∵ sin θ = , और cosec θ =
∴
⇒
⇒
∵ cos θ = , और sec θ =
∴
⇒
⇒
∵ tan θ = , और cot θ =
∴
⇒
⇒
📚 महत्वपूर्ण बातें
👉 sin θ, cos θ, tan θ आदि दो लंबाइयों के अनुपात हैं। इसलिए इनकी कोई इकाई नहीं होती।
👉 sin θ का अर्थ sin × θ नहीं है। यह θ के सापेक्ष लंब और कर्ण का अनुपात है।
👉 समकोण के सामने वाली भुजा कर्ण कहलाती है। θ के सामने वाली भुजा लंब और θ से लगी हुई भुजा आधार कहलाती है।
👉 किसी निश्चित कोण के त्रिकोणमितीय अनुपात केवल उस कोण के मान पर निर्भर करते हैं। त्रिभुज बड़ा या छोटा होने पर भी यदि कोण समान है, तो अनुपातों के मान नहीं बदलते।
👉 त्रिकोणमिति में केवल sin, cos या tan लिखना पूर्ण नहीं है। इन्हें किसी निश्चित कोण के साथ लिखा जाता है, जैसे sin θ, cos θ, tan θ।
👉 sin² θ का अर्थ (sin θ)² है, जबकि sin θ² का अर्थ sin(θ²) है। इसलिए sin² θ और sin θ² एक समान नहीं हैं।
👉 इसी प्रकार (cos θ)⁵ = cos⁵ θ और (tan θ)⁷ = tan⁷ θ लिखा जा सकता है।
समकोण त्रिभुज के सूत्र से
हम जानते हैं कि समकोण त्रिभुज में लंब के वर्ग और आधार के वर्ग का योग कर्ण के वर्ग के बराबर होता है।
अर्थात, p² + b² = h²
दोनों पक्षों को h² से भाग देने पर हमें मिलता है:
∴
⇒
⇒ (∵ sin θ = और cos θ = )
फिर, p² + b² = h²
दोनों पक्षों को b² से भाग देने पर हमें मिलता है:
∴
⇒
⇒
⇒ (∵ tan θ = और sec θ = )
⇒
और, p² + b² = h²
दोनों पक्षों को p² से भाग देने पर हमें मिलता है:
∴
⇒
⇒
⇒ (∵ cot θ = और cosec θ = )
⇒
📚 त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
✅ कर्ण = h, लंब = p और आधार = b
⭐ sin θ =
⭐ cos θ =
⭐ tan θ =
⭐ cosec θ =
⭐ sec θ =
⭐ cot θ =
⭐ sin θ × cosec θ = 1
⭐ cos θ × sec θ = 1
⭐ tan θ × cot θ = 1
⭐ sin² θ + cos² θ = 1
⭐ 1 + tan² θ = sec² θ
⭐ 1 + cot² θ = cosec² θ