केंद्रस्थ और वृत्तस्थ कोणों के प्रमेय (Theorems on Central and Inscribed Angles)
किसी वृत्त की एक ही जीवा या एक ही चाप केंद्र तथा परिधि के अलग-अलग बिंदुओं पर कोण बना सकती है। इन कोणों के बीच कुछ निश्चित संबंध हमेशा सत्य होते हैं। इन संबंधों को समझ लेने पर वृत्त से जुड़े बहुत से ज्यामितीय प्रमाण, अज्ञात कोणों की गणना और समवृत्तीय बिंदुओं की पहचान आसान हो जाती है।
इस page में वृत्त के कोणों से संबंधित चार महत्वपूर्ण प्रमेय और उनके उपयोग चरणबद्ध तरीके से समझाए गए हैं।
📚 पहले कुछ मूल बातें समझें
👉 केंद्रस्थ कोण (Central Angle): जिस कोण का शीर्ष वृत्त के केंद्र पर होता है। जैसे, ∠AOB।
👉 वृत्तस्थ कोण (Inscribed Angle): जिस कोण का शीर्ष वृत्त की परिधि पर होता है और जिसकी दोनों भुजाएँ वृत्त को काटती हैं। जैसे, ∠ACB।
👉 एक ही चाप पर बने कोण: यदि ∠AOB और ∠ACB दोनों कोणों की भुजाएँ वृत्त को उन्हीं बिंदुओं A और B पर मिलती हैं, तो दोनों कोण एक ही AB चाप पर बने हैं।
👉 एक ही वृत्तखंड (Same Segment): किसी जीवा के एक ही ओर और वृत्त की परिधि के उसी भाग पर स्थित बिंदु एक ही वृत्तखंड में माने जाते हैं।
⭐ प्रमेय 1: किसी चाप द्वारा केंद्र पर बना कोण उसी चाप द्वारा वृत्त के शेष भाग के किसी बिंदु पर बने कोण का दोगुना होता है
| दिया है: | O केंद्र वाले एक वृत्त में AB चाप द्वारा केंद्र पर ∠AOB और उसी चाप द्वारा परिधि पर ∠ACB बना है। |
| सिद्ध करना है: | ∠AOB = 2∠ACB। |
| रचना: | C और O को मिलाकर CO को O के आगे D तक बढ़ाया। |
| प्रमाण: | △AOC में OA = OC। [एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ] |
| ∴ | ∠OAC = ∠ACO। [समद्विबाहु त्रिभुज के आधार कोण बराबर होते हैं] |
| फिर, | △AOC की भुजा CO को D तक बढ़ाने पर बाह्य कोण प्रमेय से ∠AOD = ∠OAC + ∠ACO। |
| ∴ | ∠AOD = 2∠ACO। ...(i) |
| इसी प्रकार, | △BOC में OB = OC। [एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ] |
| ∴ | ∠OBC = ∠BCO। |
| और, | बाह्य कोण ∠BOD = ∠OBC + ∠BCO = 2∠BCO। ...(ii) |
| अब, | यदि केंद्र O, ∠ACB के अंदर स्थित है, तो ∠AOB = ∠AOD + ∠DOB तथा ∠ACB = ∠ACO + ∠OCB। |
| ∴ | (i) और (ii) से ∠AOB = 2∠ACO + 2∠OCB = 2(∠ACO + ∠OCB)। |
| ∴ | ∠AOB = 2∠ACB। [सिद्ध हुआ] |
📚 अन्य स्थितियों में भी यही संबंध सत्य है
वृत्त का केंद्र O, ∠ACB की किसी एक भुजा पर या कोण के बाहर भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में आवश्यकता के अनुसार कोणों के योग के स्थान पर अंतर का उपयोग किया जाता है, लेकिन परिणाम वही मिलता है:
∠AOB = 2∠ACB।
अर्थात संबंधित चाप लघु चाप, अर्धवृत्त या दीर्घ चाप हो, सही केंद्रस्थ कोण लेने पर यही मूल संबंध लागू होता है।
📚 प्रमेय का सीधा अर्थ
एक ही चाप के लिए,
केंद्रस्थ कोण = 2 × वृत्तस्थ कोण।
और उल्टा,
वृत्तस्थ कोण = 1/2 × केंद्रस्थ कोण।
💡 सरल उदाहरण
यदि एक ही चाप पर बना केंद्रस्थ कोण 100° है, तो उसी चाप पर बना वृत्तस्थ कोण
100° ÷ 2 = 50°।
⭐ प्रमेय 2: एक ही वृत्तखंड में बने सभी वृत्तस्थ कोण बराबर होते हैं
| दिया है: | O केंद्र वाले वृत्त में C और D, जीवा AB के एक ही वृत्तखंड में स्थित हैं। ∠ACB और ∠ADB एक ही जीवा या चाप AB पर बने वृत्तस्थ कोण हैं। |
| सिद्ध करना है: | ∠ACB = ∠ADB। |
| रचना: | OA और OB को मिलाया। |
| प्रमाण: | केंद्रस्थ कोण ∠AOB और वृत्तस्थ कोण ∠ACB एक ही AB चाप पर बने हैं। |
| ∴ | प्रमेय 1 के अनुसार ∠AOB = 2∠ACB। ...(i) |
| फिर, | उसी AB चाप पर केंद्रस्थ कोण ∠AOB और वृत्तस्थ कोण ∠ADB बने हैं। |
| ∴ | प्रमेय 1 के अनुसार ∠AOB = 2∠ADB। ...(ii) |
| ∴ | (i) और (ii) से 2∠ACB = 2∠ADB। |
| अतः, | ∠ACB = ∠ADB। [सिद्ध हुआ] |
📚 प्रमेय का सरल अर्थ
एक ही जीवा AB को वृत्त के एक ही वृत्तखंड के अलग-अलग बिंदुओं से देखने पर उस जीवा द्वारा बने सभी वृत्तस्थ कोण बराबर होते हैं।
💡 सरल उदाहरण
यदि C और D, जीवा AB के एक ही वृत्तखंड में हैं और ∠ACB = 42°, तो
∠ADB = 42°।
⭐ प्रमेय 3: यदि कोई रेखाखंड उसके एक ही ओर स्थित दो बिंदुओं पर बराबर कोण बनाता है, तो चारों बिंदु समवृत्तीय होते हैं
यह एक ही वृत्तखंड में बने कोणों के प्रमेय का महत्वपूर्ण विलोम (Converse) है।
| दिया है: | AB रेखाखंड के एक ही ओर C और D बिंदु स्थित हैं तथा ∠ACB = ∠ADB। |
| सिद्ध करना है: | A, B, C, D चारों बिंदु समवृत्तीय हैं। |
| रचना: | A, B, C तीन असमरेखीय बिंदुओं से होकर एक वृत्त खींचा। मान लें कि रेखा AD उस वृत्त को फिर D′ पर काटती है। BD′ को मिलाया। |
| प्रमाण: | A, B, C, D′ एक ही वृत्त पर स्थित हैं। इसलिए एक ही वृत्तखंड में बने कोणों के प्रमेय से, |
| ∴ | ∠AD′B = ∠ACB। ...(i) |
| फिर, | दिया है ∠ADB = ∠ACB। ...(ii) |
| ∴ | (i) और (ii) से ∠AD′B = ∠ADB। |
| लेकिन, | A, D, D′ एक ही सीधी रेखा पर हैं और D, D′ दोनों AB के एक ही ओर हैं। किसी निश्चित रेखा के साथ उसके एक ही ओर एक निश्चित कोण बनाने वाली किरण की दिशा एक ही होती है। |
| ∴ | DB और D′B एक ही सीधी रेखा पर होंगे। साथ ही D और D′ दोनों रेखा AD पर हैं। |
| अतः, | D ≡ D′। इसलिए D भी A, B, C से गुजरने वाले वृत्त पर स्थित है। |
| इसलिए, | A, B, C, D चारों बिंदु समवृत्तीय हैं। [सिद्ध हुआ] |
📚 समवृत्तीय बिंदु पहचानने का आसान नियम
यदि C और D, रेखाखंड AB के एक ही ओर हों और
∠ACB = ∠ADB,
तो हम सीधे कह सकते हैं कि
A, B, C, D समवृत्तीय हैं।
⭐ प्रमेय 4: अर्धवृत्त में बना कोण समकोण होता है
| दिया है: | O केंद्र वाले वृत्त में AB एक व्यास है और C अर्धवृत्त पर कोई बिंदु है। इसलिए ∠ACB अर्धवृत्त में बना कोण है। |
| सिद्ध करना है: | ∠ACB = 90°। |
| प्रमाण: | क्योंकि AB एक व्यास है, इसलिए केंद्र पर बना सीधा कोण ∠AOB = 180°। |
| फिर, | केंद्रस्थ कोण ∠AOB और वृत्तस्थ कोण ∠ACB एक ही अर्धवृत्ताकार चाप AB पर बने हैं। |
| ∴ | प्रमेय 1 के अनुसार ∠AOB = 2∠ACB। |
| ∴ | 180° = 2∠ACB। |
| ∴ | ∠ACB = 90°। |
| अतः, | अर्धवृत्त में बना कोण समकोण होता है। [सिद्ध हुआ] |
📚 एक और तरीके से प्रमाण
OC को मिलाएँ। क्योंकि OA = OC तथा OB = OC, इसलिए △AOC और △BOC दोनों समद्विबाहु त्रिभुज हैं।
मान लें,
∠OAC = ∠OCA = x तथा ∠OBC = ∠OCB = y।
तब,
∠ACB = x + y।
अब △ABC में,
∠BAC + ∠ABC + ∠ACB = 180°।
अर्थात,
x + y + (x + y) = 180°।
इसलिए,
2(x + y) = 180°और अतः,
∠ACB = x + y = 90°।
📚 अनुप्रयोग 1: वृत्तस्थ कोण से केंद्रस्थ कोण ज्ञात करना
यदि एक ही चाप पर बना वृत्तस्थ कोण 35° है, तो
केंद्रस्थ कोण = 2 × 35° = 70°।
अतः केंद्रस्थ कोण 70° है।
📚 अनुप्रयोग 2: केंद्रस्थ कोण से वृत्तस्थ कोण ज्ञात करना
यदि एक ही चाप पर बना केंद्रस्थ कोण 124° है, तो
वृत्तस्थ कोण = 124° ÷ 2 = 62°।
📚 अनुप्रयोग 3: एक ही वृत्तखंड में अज्ञात कोण ज्ञात करना
मान लें C और D, जीवा AB के एक ही वृत्तखंड में हैं तथा ∠ACB = 48°।
एक ही वृत्तखंड में बने कोणों के प्रमेय के अनुसार,
∠ADB = ∠ACB = 48°।
📚 अनुप्रयोग 4: चार बिंदु समवृत्तीय हैं या नहीं, जाँच करना
मान लें C और D, रेखाखंड AB के एक ही ओर हैं और
∠ACB = 58°, ∠ADB = 58°।
अर्थात,
∠ACB = ∠ADB।
इसलिए विलोम प्रमेय के अनुसार A, B, C, D चारों बिंदु समवृत्तीय हैं।
📚 अनुप्रयोग 5: व्यास की सहायता से समकोण त्रिभुज पहचानना
मान लें AB किसी वृत्त का व्यास है और C वृत्त पर एक बिंदु है।
अर्धवृत्त में बने कोण के प्रमेय के अनुसार,
∠ACB = 90°।
इसलिए △ABC एक समकोण त्रिभुज है और AB उसका कर्ण है।
वृत्त के भीतर समकोण त्रिभुज पहचानने में यह परिणाम बहुत उपयोगी है।
🧩 NCERT-style हल किए हुए उदाहरण
उदाहरण 1
O केंद्र वाले एक वृत्त में ∠AOB = 146° है। C वृत्त के शेष भाग पर एक बिंदु है और ∠ACB उसी चाप AB पर बना है। ∠ACB ज्ञात कीजिए।
हल:
∠ACB = 1/2 × ∠AOB = 1/2 × 146° = 73°।
अतः ∠ACB = 73°।
उदाहरण 2
P और Q, जीवा AB के एक ही वृत्तखंड में स्थित हैं। यदि ∠APB = 3x + 5° और ∠AQB = 5x - 25°, तो x और दोनों कोणों का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
एक ही वृत्तखंड में बने कोण बराबर होते हैं।
3x + 5 = 5x - 25 2x = 30x = 15।
इसलिए,
∠APB = 3 × 15 + 5 = 50°।
अतः दोनों कोण 50° हैं।
उदाहरण 3
AB किसी वृत्त का व्यास है। C वृत्त पर स्थित है। यदि ∠CAB = 32°, तो ∠ABC ज्ञात कीजिए।
हल:
क्योंकि AB व्यास है,
∠ACB = 90°।
अब △ABC के कोणों के योग से,
∠ABC = 180° - 90° - 32° = 58°।
✍️ अभ्यास प्रश्न
-
किसी चाप द्वारा केंद्र पर बना कोण 132° है। उसी चाप द्वारा वृत्त के शेष भाग के किसी बिंदु पर बना कोण ज्ञात कीजिए।
-
चाप PQ पर बना वृत्तस्थ कोण 47° है। उसी चाप पर बना केंद्रस्थ कोण ज्ञात कीजिए।
-
C और D, जीवा AB के एक ही वृत्तखंड में हैं। यदि ∠ACB = 64°, तो ∠ADB ज्ञात कीजिए।
-
C और D, AB के एक ही ओर हैं। यदि ∠ACB = 71° और ∠ADB = 71°, तो A, B, C, D के बारे में क्या निष्कर्ष निकालेंगे?
-
AB किसी वृत्त का व्यास है और C वृत्त पर स्थित है। यदि ∠BAC = 41°, तो ∠ABC ज्ञात कीजिए।
-
एक ही वृत्तखंड में ∠APB = 4x + 8° और ∠AQB = 6x - 22° हैं। x और दोनों कोणों का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर
- 66°
- 94°
- 64°
- A, B, C, D समवृत्तीय हैं
- 49°
- x = 15, और दोनों कोण 68° हैं
📚 चारों प्रमेय एक साथ
| विषय | मुख्य परिणाम |
|---|---|
| केंद्रस्थ और वृत्तस्थ कोण | केंद्रस्थ कोण = 2 × वृत्तस्थ कोण |
| एक ही वृत्तखंड के कोण | एक ही जीवा पर एक ही वृत्तखंड में बने सभी वृत्तस्थ कोण बराबर होते हैं |
| समवृत्तीय होने की शर्त | ∠ACB = ∠ADB ⇒ A, B, C, D समवृत्तीय [एक ही ओर] |
| अर्धवृत्त में बना कोण | 90° |
⚠️ सामान्य गलतियाँ
👉 गलत: कोई भी केंद्रस्थ कोण किसी भी वृत्तस्थ कोण का दोगुना होता है।
सही: दोनों कोणों को एक ही चाप पर बना होना चाहिए।
👉 गलत: एक ही जीवा पर बने सभी वृत्तस्थ कोण बराबर होते हैं।
सही: कोणों के शीर्ष एक ही वृत्तखंड, यानी जीवा के एक ही ओर वृत्त के उसी भाग पर होने चाहिए।
👉 गलत: ∠ACB = ∠ADB होने पर हर स्थिति में चारों बिंदु समवृत्तीय होंगे।
सही: इस रूप के विलोम प्रमेय में C और D का AB के एक ही ओर होना आवश्यक है।
👉 गलत: किसी भी जीवा से बना कोण 90° माना जा सकता है।
सही: अर्धवृत्त वाले प्रमेय के लिए संबंधित जीवा व्यास होनी चाहिए।
👉 गलत: ∠AOB = 2∠ACB से ∠ACB = 2∠AOB लिखना।
सही: ∠ACB = 1/2 ∠AOB।
👉 गलत: दीर्घ चाप की स्थिति में हमेशा छोटा केंद्रस्थ कोण लेना।
सही: उसी चाप से संबंधित सही केंद्रस्थ कोण लेना चाहिए जिस चाप पर वृत्तस्थ कोण बना है। दीर्घ चाप के लिए कभी-कभी reflex central angle की आवश्यकता होती है।
📚 याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
👉 एक ही चाप पर बना केंद्रस्थ कोण उसी चाप पर बने वृत्तस्थ कोण का दोगुना होता है।
👉 एक ही वृत्तखंड में बने सभी वृत्तस्थ कोण बराबर होते हैं।
👉 यदि कोई रेखाखंड उसके एक ही ओर स्थित दो बिंदुओं पर बराबर कोण बनाता है, तो संबंधित चारों बिंदु समवृत्तीय होते हैं।
👉 व्यास द्वारा केंद्र पर बना कोण 180° होता है।
👉 अर्धवृत्त में बना कोण 90° होता है।
👉 व्यास के दोनों सिरों और वृत्त के किसी अन्य बिंदु से बना त्रिभुज समकोण त्रिभुज होता है; व्यास उसका कर्ण होता है।
👉 केंद्रस्थ कोण दिया हो तो संबंधित वृत्तस्थ कोण पाने के लिए 2 से भाग करें।
👉 वृत्तस्थ कोण दिया हो तो उसी चाप का केंद्रस्थ कोण पाने के लिए 2 से गुणा करें।
👉 किसी प्रमेय का उपयोग करने से पहले यह स्पष्ट पहचानना सबसे जरूरी है कि कौन-सी जीवा या चाप कौन-सा कोण बना रही है।