वृत्त से संबंधित प्रमेय (Circle Theorems)

इस पाठ में वृत्त के तीन महत्वपूर्ण प्रमेय क्रमबद्ध ढंग से सिद्ध किए गए हैं। शुरू करने से पहले केंद्र, त्रिज्या, जीवा, लंब और लंब समद्विभाजक की अवधारणा स्पष्ट होनी चाहिए।

जल्दी याद करें

  • एक ही वृत्त की सभी त्रिज्याएँ बराबर होती हैं।
  • जीवा के दोनों सिरे वृत्त पर होते हैं।
  • लंब समद्विभाजक किसी रेखाखंड को दो बराबर भागों में बाँटता है और उस पर लंब होता है।
  • सर्वांगसम त्रिभुजों की संगत भुजाएँ और संगत कोण बराबर होते हैं।

⭐ तीन असंरेख बिंदुओं से एक और केवल एक वृत्त खींचा जा सकता है

यह प्रमाण अवधारणा समझाने के लिए दिया गया है। परीक्षा में इसे लिखना आवश्यक है या नहीं, यह अपने पाठ्यक्रम के अनुसार देख लें।

तीन असंरेख बिंदुओं से गुजरने वाला एकमात्र वृत्त

तीन असंरेख बिंदुओं से गुजरने वाला एकमात्र वृत्त

दिया है:

A, B, C तीन निश्चित असंरेख बिंदु हैं।

सिद्ध करना है:

A, B, C से एक और केवल एक वृत्त खींचा जा सकता है।

रचना:

AB और BC को मिलाएँ। उनके लंब समद्विभाजक क्रमशः PQ और RS खींचें, जो O पर मिलते हैं। D और E क्रमशः AB और BC के मध्यबिंदु हैं। OA, OB और OC को मिलाएँ।

वे क्यों मिलते हैं?

A, B, C असंरेख हैं, इसलिए AB और BC प्रतिच्छेदी रेखाएँ हैं, समांतर नहीं। उनके लंब समद्विभाजक भी समांतर नहीं हैं और केवल एक बिंदु O पर मिलते हैं।

प्रमाण:

पहले मान लें कि O और D अलग बिंदु हैं। △OAD और △OBD में:

AD = DB। [D, AB का मध्यबिंदु है]

∠ODA = ∠ODB = 90°। [PQ ⟂ AB]

OD उभयनिष्ठ भुजा है।

∴

△OAD ≅ △OBD। [SAS सर्वांगसमता कसौटी]

∴

OA = OB। [सर्वांगसम त्रिभुजों की संगत भुजाएँ]

विशेष स्थिति:

यदि O = D, तो D के मध्यबिंदु होने से सीधे OA = OB मिलता है। इस स्थिति में त्रिभुजों की सर्वांगसमता दिखाने की आवश्यकता नहीं है।

इसी प्रकार,

O, BC के लंब समद्विभाजक पर है। यदि O ≠ E, तो SAS से △OBE ≅ △OCE और इसलिए OB = OC। यदि O = E, तो BE = EC से यही परिणाम सीधे मिलता है।

∴

OA = OB = OC।

अर्थात,

A, B, C, तीनों O से समान दूरी पर हैं। इसलिए O केंद्र और OA त्रिज्या वाला वृत्त तीनों बिंदुओं से गुजरता है।

∴तीन असंरेख बिंदुओं से एक वृत्त खींचना संभव है।
एकमात्र होने का प्रमाण:

A, B, C से गुजरने वाले किसी भी वृत्त का केंद्र A और B से तथा B और C से समान दूरी पर होगा। इसलिए उसे दोनों लंब समद्विभाजकों PQ और RS पर होना चाहिए।

∴

इनका केवल एक प्रतिच्छेद बिंदु है, इसलिए केंद्र O ही होगा।

साथ ही,

त्रिज्या OA भी निश्चित है। निश्चित केंद्र और निश्चित त्रिज्या से केवल एक वृत्त बनता है।

∴

तीन असंरेख बिंदुओं A, B, C से एक और केवल एक वृत्त गुजरता है।

[सिद्ध हुआ]

इससे हमने क्या सीखा?

△ABC की दो भुजाओं के लंब समद्विभाजक जिस बिंदु पर मिलते हैं, वह तीनों शीर्षों से समान दूरी पर होता है।

यही बिंदु त्रिभुज का परिकेंद्र (Circumcentre) है। यह A, B, C से गुजरने वाले परिवृत्त (Circumcircle) का केंद्र भी है।

⭐ व्यास से भिन्न जीवा पर केंद्र से खींचा गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है

दिया है:

O केंद्र वाले वृत्त में AB एक जीवा है, जो व्यास नहीं है। केंद्र से खींचा गया लंब AB को D पर मिलता है। अर्थात OD ⟂ AB।

सिद्ध करना है:

AD = DB।

रचना:

OA और OB को मिलाएँ।

प्रमाण:

OD ⟂ AB होने से △OAD और △OBD समकोण त्रिभुज हैं।

अब,

OA = OB। [एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ; ये दोनों त्रिभुजों के कर्ण हैं]

OD = OD। [उभयनिष्ठ भुजा]

∠ODA = ∠ODB = 90°।

∴

△OAD ≅ △OBD। [RHS सर्वांगसमता कसौटी]

∴

AD = DB। [सर्वांगसम त्रिभुजों की संगत भुजाएँ]

अतः,

D, जीवा AB का मध्यबिंदु है।

∴

व्यास से भिन्न जीवा पर केंद्र से खींचा गया लंब उसे समद्विभाजित करता है। [सिद्ध हुआ]

प्रमेय का उपयोग

यदि AB = 18 सेमी और OD ⟂ AB हो, तो

AD = DB = 18 ÷ 2 = 9 सेमी।

अर्थात केंद्र से जीवा पर खींचे गए लंब का पादबिंदु ही जीवा का मध्यबिंदु होता है।

⭐ व्यास से भिन्न जीवा के मध्यबिंदु को केंद्र से मिलाने वाली रेखा जीवा पर लंब होती है

यह पिछले प्रमेय का विलोम प्रमेय है।

दिया है:

O केंद्र वाले वृत्त की जीवा AB व्यास नहीं है। D इसका मध्यबिंदु है, अर्थात AD = DB। OD को मिलाया गया है।

सिद्ध करना है:

OD ⟂ AB।

रचना:

OA और OB को मिलाएँ।

प्रमाण:

△OAD और △OBD में:

OA = OB। [एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ]

AD = DB। [दिया है]

OD = OD। [उभयनिष्ठ भुजा]

∴

△OAD ≅ △OBD। [SSS सर्वांगसमता कसौटी]

∴

∠ODA = ∠ODB। [सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत कोण]

अब,

A, D, B एक सीधी रेखा पर हैं और D, A तथा B के बीच है। इसलिए ∠ODA और ∠ODB एक रैखिक युग्म बनाते हैं।

अर्थात,

∠ODA + ∠ODB = 180°।

चूँकि,

दोनों कोण बराबर हैं, इसलिए प्रत्येक कोण 180° ÷ 2 = 90° है।

∴

∠ODA = ∠ODB = 90°।

∴

OD ⟂ AB। [सिद्ध हुआ]

⭐ दोनों जीवा प्रमेयों को एक साथ समझें

केंद्र से जीवा पर लंब

⇒ जीवा के मध्यबिंदु से गुजरता है।

केंद्र और जीवा के मध्यबिंदु की संयोजक रेखा

⇒ जीवा पर लंब होती है।

व्यास से भिन्न जीवा के लिए केंद्र से जीवा पर खींचा गया लंब और केंद्र को जीवा के मध्यबिंदु से मिलाने वाली रेखा एक ही रेखा हैं।

“व्यास से भिन्न” होने पर O और D अलग बिंदु होते हैं। व्यास का मध्यबिंदु स्वयं केंद्र होता है, इसलिए इन संपाती बिंदुओं को मिलाकर कोई निश्चित रेखा नहीं बनती।

⭐ छोटे-छोटे हल किए उदाहरण

उदाहरण 1: जीवा के दो भाग ज्ञात करना

AB एक जीवा है, जो व्यास नहीं है, और AB = 20 सेमी। केंद्र O से AB पर लंब OD खींचा गया है।

प्रमेय के अनुसार,

AD = DB।

इसलिए,

AD = DB = 20 ÷ 2 = 10 सेमी।

उत्तर: AD = DB = 10 सेमी।

उदाहरण 2: कैसे पहचानें कि रेखा जीवा पर लंब है?

D, व्यास से भिन्न जीवा AB का मध्यबिंदु है और O वृत्त का केंद्र है।

चूँकि,

AD = DB,

और OD केंद्र को जीवा के मध्यबिंदु से मिलाता है, इसलिए विलोम प्रमेय से,

OD ⟂ AB।

उत्तर: OD, जीवा AB पर लंब है।

⚠️ सामान्य गलतियाँ और उनसे बचने के तरीके

🔸 तीन बिंदुओं से वृत्त वाले प्रमेय में “असंरेख” शब्द आवश्यक है। एक सीधी रेखा के तीन अलग-अलग बिंदुओं से कोई सीमित त्रिज्या वाला वृत्त नहीं गुजर सकता।

🔸 विलोम जीवा प्रमेय में केवल दो कोण बराबर दिखाने से लंब होने का प्रमाण पूरा नहीं होता। दोनों कोण रैखिक युग्म भी बनाते हैं, इसलिए उनका योग 180° है। बराबर होने से प्रत्येक 90° होगा।

🔸 RHS और SSS सर्वांगसमता कसौटियों में भ्रम न करें। पहले दी गई जानकारी पहचानें। RHS में समकोण त्रिभुजों के कर्ण और एक संगत भुजा बराबर होती है। SSS में तीनों संगत भुजाएँ बराबर होती हैं।

🔸 केंद्र को जीवा के मध्यबिंदु से मिलाते समय जीवा का व्यास से भिन्न होना याद रखें। अन्यथा दोनों बिंदु संपाती होंगे और OD कोई निश्चित रेखा नहीं बनाएगा।

📚 याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें

🔹 तीन निश्चित असंरेख बिंदुओं से केवल एक वृत्त गुजरता है।

🔹 उसका केंद्र पाने के लिए उन बिंदुओं को जोड़ने वाले दो रेखाखंडों के लंब समद्विभाजकों का प्रतिच्छेद बिंदु ज्ञात करें।

🔹 त्रिभुज की भुजाओं के लंब समद्विभाजक उसके परिकेंद्र पर मिलते हैं।

🔹 केंद्र से व्यास से भिन्न जीवा पर खींचा गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है।

🔹 केंद्र और व्यास से भिन्न जीवा के मध्यबिंदु की संयोजक रेखा जीवा पर लंब होती है।

🔹 दोनों जीवा प्रमेय एक-दूसरे के विलोम हैं।

जल्दी दोहराएँ

नीचे जीवा वाले कथनों में O केंद्र है, AB व्यास नहीं है और D, AB पर है।

तीन असंरेख बिंदुएक और केवल एक वृत्त निर्धारित करते हैं।
OD ⟂ AB⇒ AD = DB
AD = DB⇒ OD ⟂ AB

पहले वृत्त की मूल अवधारणाएँ समझें

जीवा, व्यास, चाप, वृत्तखंड या त्रिज्यखंड की अवधारणा स्पष्ट न हो, तो पहले वृत्त की मूल अवधारणाएँ (Basic Concepts of a Circle) वाला पाठ पढ़ें।