त्रिभुज में संगामिता के प्रमेय (Theorems on Concurrence)
ज्यामिति में जब तीन या अधिक रेखाएँ एक ही बिंदु से होकर गुजरती हैं, तो उन्हें संगामी रेखाएँ (Concurrent Lines) कहा जाता है। त्रिभुज में लंब समद्विभाजक, शीर्षलंब, अंतःकोण समद्विभाजक और माध्यिकाओं से संबंधित चार महत्वपूर्ण संगामिता प्रमेय हैं।
🔎 महत्वपूर्ण प्रमेय एक नज़र में
👉 त्रिभुज की तीनों भुजाओं के लंब समद्विभाजक संगामी होते हैं। उनका संगम बिंदु परिकेंद्र (Circumcenter) कहलाता है।
👉 त्रिभुज के तीनों शीर्षलंब संगामी होते हैं। उनका संगम बिंदु लंबकेंद्र (Orthocenter) कहलाता है।
👉 त्रिभुज के तीनों अंतःकोण समद्विभाजक संगामी होते हैं। उनका संगम बिंदु अंतःकेंद्र (Incenter) कहलाता है।
👉 त्रिभुज की तीनों माध्यिकाएँ संगामी होती हैं। उनका संगम बिंदु केन्द्रक (Centroid) कहलाता है।
⭐ त्रिभुज की तीनों भुजाओं के लंब समद्विभाजक संगामी होते हैं।
△ABC में AB, BC और CA के मध्यबिंदु क्रमशः D, E और F हैं
| दिया है: | △ABC में AB, BC और CA के मध्यबिंदु क्रमशः D, E और F हैं। D से AB पर और E से BC पर खींचे गए लंब O बिंदु पर मिलते हैं। |
| सिद्ध करना है: | AB, BC और CA के लंब समद्विभाजक संगामी हैं। इसके लिए OF ⟂ AC सिद्ध करना पर्याप्त है, क्योंकि तब O, AC के लंब समद्विभाजक पर भी स्थित होगा। |
| रचना: | O को A, B और C से मिलाइए। |
| प्रमाण: | △AOD और △BOD में, |
| AD = BD [D, AB का मध्यबिंदु है] | |
| ∠ADO = ∠BDO = 90° [OD ⟂ AB] | |
| OD उभयनिष्ठ भुजा है। | |
| अतः, | △AOD ≅ △BOD [SAS] |
| इसलिए, | OA = OB [सर्वांगसम त्रिभुजों की संगत भुजाएँ] ...(i) |
| इसी प्रकार, | △BOE ≅ △COE [SAS] |
| इसलिए, | OB = OC ...(ii) |
| (i) और (ii) से, | OA = OC. |
| अब, | △AFO और △CFO में, |
| OA = OC [ऊपर सिद्ध किया गया] | |
| AF = CF [F, AC का मध्यबिंदु है] | |
| OF उभयनिष्ठ भुजा है। | |
| अतः, | △AFO ≅ △CFO [SSS] |
| इसलिए, | ∠AFO = ∠CFO [सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत कोण] |
| लेकिन, | ∠AFO और ∠CFO, सीधी रेखा AC पर बने रैखिक युग्म हैं। दोनों बराबर हैं, इसलिए प्रत्येक कोण 90° है। |
| अतः, | OF ⟂ AC. |
| इसलिए, | △ABC की तीनों भुजाओं के लंब समद्विभाजक संगामी हैं। [सिद्ध] |
इनका संगम बिंदु परिकेंद्र (Circumcenter) कहलाता है। परिकेंद्र त्रिभुज के तीनों शीर्षों से समान दूरी पर होता है:
OA = OB = OC.
⭐ त्रिभुज के तीनों शीर्षलंब संगामी होते हैं।
△ABC के शीर्ष A, B और C से विपरीत भुजाओं BC, CA और AB पर क्रमशः AD, BE और CF लंब हैं
| दिया है: | △ABC के शीर्ष A, B और C से विपरीत भुजाओं BC, CA और AB पर क्रमशः AD, BE और CF लंब खींचे गए हैं। |
| सिद्ध करना है: | AD, BE और CF संगामी हैं। |
| रचना: | A, B और C से क्रमशः BC, CA और AB के समांतर रेखाएँ खींचिए। ये रेखाएँ परस्पर P, Q और R पर मिलकर △PQR बनाती हैं। |
| प्रमाण: | रचना के अनुसार APBC, ABCR और ABQC समांतर चतुर्भुज हैं। |
| समांतर चतुर्भुज APBC से, | AP = BC. |
| समांतर चतुर्भुज ABCR से, | AR = BC. |
| अतः, | AP = AR. इसलिए A, PR का मध्यबिंदु है। |
| इसी प्रकार, | B, PQ का मध्यबिंदु और C, QR का मध्यबिंदु है। |
| फिर, | PR ∥ BC [रचना से] |
| और, | AD ⟂ BC [दिया है] |
| अतः, | AD ⟂ PR [क्योंकि PR ∥ BC] |
| इसलिए, | AD, △PQR की भुजा PR का लंब समद्विभाजक है। |
| इसी प्रकार, | BE, PQ का लंब समद्विभाजक और CF, QR का लंब समद्विभाजक है। |
| लेकिन, | किसी त्रिभुज की तीनों भुजाओं के लंब समद्विभाजक संगामी होते हैं। |
| अतः, | AD, BE और CF संगामी हैं। |
| इसलिए, | △ABC के तीनों शीर्षलंब संगामी होते हैं। [सिद्ध] |
तीनों शीर्षलंबों का संगम बिंदु लंबकेंद्र (Orthocenter) कहलाता है।
⭐ त्रिभुज के तीनों अंतःकोण समद्विभाजक संगामी होते हैं।
△ABC में ∠A, ∠B और ∠C के अंतःकोण समद्विभाजक
| दिया है: | △ABC में ∠B और ∠C के अंतःसमद्विभाजक O बिंदु पर मिलते हैं। A और O को मिलाइए। |
| सिद्ध करना है: | ∠A, ∠B और ∠C के अंतःसमद्विभाजक संगामी हैं। अर्थात AO, ∠A का समद्विभाजक है। |
| रचना: | O से AB, BC और AC पर क्रमशः OP, OQ और OR लंब खींचिए। |
| प्रमाण: | △BOQ और △BOP में, |
| ∠OBQ = ∠OBP [BO, ∠B का समद्विभाजक है] | |
| ∠OQB = ∠OPB = 90° [OQ ⟂ BC और OP ⟂ AB] | |
| BO उभयनिष्ठ भुजा है। | |
| अतः, | △BOQ ≅ △BOP [AAS] |
| इसलिए, | OQ = OP [सर्वांगसम त्रिभुजों की संगत भुजाएँ] ...(i) |
| इसी प्रकार, | △COQ ≅ △COR [AAS] |
| इसलिए, | OQ = OR ...(ii) |
| (i) और (ii) से, | OP = OR ...(iii) |
| अब, | समकोण त्रिभुज △APO और △ARO पर विचार करें। |
| ∠OPA = ∠ORA = 90°. | |
| AO उभयनिष्ठ कर्ण है। | |
| OP = OR [(iii) से] | |
| अतः, | △APO ≅ △ARO [RHS] |
| इसलिए, | ∠PAO = ∠RAO [सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत कोण] |
| अतः, | AO, ∠A का समद्विभाजक है। |
| इसलिए, | △ABC के तीनों अंतःकोण समद्विभाजक संगामी होते हैं। [सिद्ध] |
इनका संगम बिंदु अंतःकेंद्र (Incenter) कहलाता है। अंतःकेंद्र त्रिभुज की तीनों भुजाओं से समान लंब दूरी पर होता है।
⭐ त्रिभुज की तीनों माध्यिकाएँ संगामी होती हैं।
△ABC की माध्यिकाएँ AD, BE और CF, G बिंदु पर मिलती हैं
| दिया है: | △ABC की माध्यिकाएँ BE और CF, G बिंदु पर मिलती हैं। A और G को मिलाकर आगे बढ़ाने पर यह BC को D पर काटती है। |
| सिद्ध करना है: | AD तीसरी माध्यिका है। अर्थात D, BC का मध्यबिंदु है। तब सिद्ध होगा कि तीनों माध्यिकाएँ संगामी हैं। |
| रचना: | AD को H तक इस प्रकार बढ़ाइए कि AG = GH हो। B को H से और C को H से मिलाइए। |
| प्रमाण: | △ABH में F, AB का मध्यबिंदु है [CF माध्यिका है]। |
| और, | G, AH का मध्यबिंदु है [AG = GH]। |
| अतः, | FG ∥ BH [मध्यबिंदु प्रमेय] |
| लेकिन, | F, G और C एक ही सीधी रेखा पर हैं [CF, G से गुजरती है]। |
| अतः, | GC ∥ BH. |
| फिर, | △ACH में E, AC का मध्यबिंदु है [BE माध्यिका है]। |
| और, | G, AH का मध्यबिंदु है। |
| अतः, | GE ∥ HC [मध्यबिंदु प्रमेय] |
| लेकिन, | B, G और E एक ही सीधी रेखा पर हैं [BE, G से गुजरती है]। |
| अतः, | BG ∥ HC. |
| अब, | चतुर्भुज BGCH में GC ∥ BH और BG ∥ HC. |
| अतः, | BGCH एक समांतर चतुर्भुज है। |
| इसलिए, | समांतर चतुर्भुज BGCH के विकर्ण BC और GH एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। |
| अतः, | D, BC का मध्यबिंदु है। |
| इसलिए, | AD, △ABC की तीसरी माध्यिका है। |
| अतः, | त्रिभुज की तीनों माध्यिकाएँ संगामी होती हैं। [सिद्ध] |
माध्यिकाओं का संगम बिंदु केन्द्रक (Centroid) कहलाता है। केन्द्रक प्रत्येक माध्यिका को शीर्ष की ओर से 2:1 के अनुपात में विभाजित करता है।
🧩 हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: परिकेंद्र और समान दूरियाँ
△ABC की भुजाओं के लंब समद्विभाजक O पर मिलते हैं। यदि OA = 6 cm, तो OB और OC ज्ञात कीजिए।
हल: O परिकेंद्र है, इसलिए वह तीनों शीर्षों से समान दूरी पर है।
OA = OB = OCअतः OB = 6 cm और OC = 6 cm।
उदाहरण 2: अंतःकेंद्र की भुजाओं से दूरी
किसी त्रिभुज के अंतःकोण समद्विभाजक I पर मिलते हैं। I से एक भुजा की लंब दूरी 4 cm है। बाकी दोनों भुजाओं से I की लंब दूरी ज्ञात कीजिए।
हल: I अंतःकेंद्र है और अंतःकेंद्र तीनों भुजाओं से समान लंब दूरी पर होता है।
अतः बाकी दोनों दूरियाँ भी 4 cm हैं।
उदाहरण 3: केन्द्रक और माध्यिका
△ABC में G केन्द्रक है और AD एक माध्यिका है। यदि AD = 12 cm, तो AG और GD ज्ञात कीजिए।
हल: केन्द्रक माध्यिका को शीर्ष की ओर से 2:1 के अनुपात में विभाजित करता है।
AG = 2/3 × 12 = 8 cm GD = 1/3 × 12 = 4 cm✍️ अभ्यास प्रश्न
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△PQR की भुजाओं के लंब समद्विभाजक O पर मिलते हैं। यदि OP = 7 cm है, तो OQ और OR ज्ञात कीजिए।
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त्रिभुज के तीनों शीर्षलंब जिस बिंदु पर मिलते हैं, उसका नाम लिखिए।
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△ABC के अंतःकोण समद्विभाजक I पर मिलते हैं। I से AB, BC और CA पर खींचे गए लंबों की लंबाइयाँ क्रमशः 5 cm, x cm और y cm हैं। x और y ज्ञात कीजिए।
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△XYZ में G केन्द्रक है और XM, 15 cm लंबी माध्यिका है। XG और GM ज्ञात कीजिए।
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परिकेंद्र, लंबकेंद्र और अंतःकेंद्र में से कौन-सा केंद्र हमेशा त्रिभुज के अंदर स्थित होता है?
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समबाहु त्रिभुज में परिकेंद्र, लंबकेंद्र, अंतःकेंद्र और केन्द्रक की स्थिति के बारे में क्या कहा जा सकता है?
✅ उत्तर
1. OQ = OR = 7 cm.
2. लंबकेंद्र (Orthocenter)।
3. x = 5 cm और y = 5 cm.
4. XG = 10 cm और GM = 5 cm.
5. अंतःकेंद्र (Incenter) हमेशा त्रिभुज के अंदर स्थित होता है।
6. चारों केंद्र एक ही बिंदु पर स्थित होते हैं।
📚 याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
👉 यदि तीन या अधिक रेखाएँ एक ही बिंदु से होकर गुजरें, तो वे संगामी रेखाएँ कहलाती हैं।
👉 त्रिभुज की तीनों भुजाओं के लंब समद्विभाजक परिकेंद्र पर मिलते हैं। परिकेंद्र तीनों शीर्षों से समान दूरी पर होता है।
👉 त्रिभुज के तीनों शीर्षलंब लंबकेंद्र पर मिलते हैं।
👉 त्रिभुज के तीनों अंतःकोण समद्विभाजक अंतःकेंद्र पर मिलते हैं। अंतःकेंद्र तीनों भुजाओं से समान लंब दूरी पर होता है।
👉 त्रिभुज की तीनों माध्यिकाएँ केन्द्रक पर मिलती हैं।
👉 केन्द्रक प्रत्येक माध्यिका को शीर्ष की ओर से 2:1 के अनुपात में विभाजित करता है।
👉 किसी भुजा का लंब समद्विभाजक और किसी कोण का समद्विभाजक अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। लंब समद्विभाजक भुजा से संबंधित होता है, जबकि कोण समद्विभाजक कोण को दो बराबर भागों में बाँटता है।
👉 ये चारों संगामिता प्रमेय हर प्रकार के त्रिभुज के लिए सत्य हैं, लेकिन सामान्यतः चारों केंद्र अलग-अलग बिंदु होते हैं।
👉 समबाहु त्रिभुज में परिकेंद्र, लंबकेंद्र, अंतःकेंद्र और केन्द्रक एक ही बिंदु पर होते हैं।
👉 संगामिता के प्रमाणों में सर्वांगसम त्रिभुज, मध्यबिंदु प्रमेय, समांतर रेखाएँ और समांतर चतुर्भुज के गुणों का अक्सर उपयोग होता है।