पाइथागोरस प्रमेय और उसका विलोम (Pythagoras Theorem and Converse)

हर समकोण त्रिभुज की तीनों भुजाओं की लंबाइयों में एक निश्चित संबंध होता है। इसे पाइथागोरस प्रमेय (Pythagoras Theorem) कहते हैं। इससे अज्ञात भुजा की लंबाई ज्ञात कर सकते हैं। इसके विलोम से तीन भुजाओं की लंबाइयों के आधार पर पहचान सकते हैं कि त्रिभुज समकोण है या नहीं।

पाइथागोरस प्रमेय

पाइथागोरस प्रमेय

📚 क्षेत्रफलों से पाइथागोरस संबंध

मान लें समकोण त्रिभुज की परस्पर लंब भुजाओं की लंबाइयाँ a और b तथा कर्ण की लंबाई c है। इन भुजाओं पर बनाए गए वर्गों के क्षेत्रफल क्रमशः a², b², c² होंगे। पाइथागोरस संबंध है:

c² = a² + b²

कर्ण पर बने वर्ग का क्षेत्रफल = अन्य दो भुजाओं पर बने वर्गों के क्षेत्रफलों का योग।

📚 एक सरल उदाहरण

यदि समकोण त्रिभुज की परस्पर लंब भुजाएँ 3 और 4 इकाई तथा कर्ण 5 इकाई है, तो:

5² = 3² + 4² 25 = 9 + 16

इस प्रकार तीनों भुजाओं पर बने वर्गों के क्षेत्रफलों में भी यही संबंध है।

📚 क्षेत्रफल की सहायता से पाइथागोरस प्रमेय का प्रमाण

दो सर्वांगसम समकोण त्रिभुजों को व्यवस्थित करके एक चतुर्भुज बनाएँगे। प्रत्येक की परस्पर लंब भुजाएँ a और b तथा कर्ण c है। सभी लंबाइयाँ धनात्मक हैं और एक ही इकाई में मापी गई हैं।

रचना

  1. एक रेखा पर A, E, D इसी क्रम में लें, जहाँ AE = b तथा ED = a हों। इसलिए AD = a + b।

  2. A और D पर AD के एक ही ओर लंब खींचकर क्रमशः AB = a तथा DC = b लें। तब AB ∥ DC।

  3. BE, CE और BC को मिलाएँ। बने हुए चतुर्भुज ABCD के अंदर तीन त्रिभुज △ABE, △BEC, △ECD हैं।

बीच का त्रिभुज समकोण क्यों है?

△ABE और △DEC में AB = DE = a, AE = DC = b तथा ∠BAE = ∠EDC = 90° हैं। SAS सर्वांगसमता से △ABE ≅ △DEC तथा BE = EC = c।

सर्वांगसमता से ∠DEC = ∠ABE। समकोण त्रिभुज △ABE में:

∠AEB + ∠ABE = 90°

अतः ∠AEB + ∠DEC = 90°। A, E, D संरेख हैं तथा EB और EC, AD के एक ही ओर हैं, इसलिए:

∠AEB + ∠BEC + ∠CED = 180°

अतः ∠BEC = 180° − 90° = 90°। इसलिए बीच के त्रिभुज △BEC का क्षेत्रफल है।

क्षेत्रफलों की तुलना

ABCD की समांतर भुजाएँ AB = a और DC = b हैं। उनके बीच की लंब दूरी AD = a + b है। अतः:

तीनों त्रिभुजों के क्षेत्रफल जोड़ने पर:

दोनों पक्षों को 2 से गुणा करने पर:

(a + b)² = 2ab + c² a² + 2ab + b² = 2ab + c²

अतः a² + b² = c²। [सिद्ध हुआ]

जब a ≠ b हो, तो यह चतुर्भुज समलंब होता है। a = b होने पर यह आयत है; तब भी यही क्षेत्रफल गणना लागू होती है।

⭐ समरूप त्रिभुजों से पाइथागोरस प्रमेय का प्रमाण

समकोण त्रिभुज के कर्ण पर बने वर्ग का क्षेत्रफल अन्य दो भुजाओं पर बने वर्गों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर होता है।

पाइथागोरस प्रमेय का प्रमाण

पाइथागोरस प्रमेय का प्रमाण

दिया है:

△ABC में ∠A = 90° है। अतः BC कर्ण है।

सिद्ध करना है:BC² = AB² + AC²
रचना:

A से कर्ण BC पर AD ⟂ BC खींचें, जो BC को आंतरिक बिंदु D पर काटता है। इसलिए BD + DC = BC।

प्रमाण:△ABD और △CBA में,
चूँकि:∠ADB = ∠CAB = 90°
और:∠ABD = ∠CBA
अतः:

△ABD ~ △CBA [AA समरूपता]

अतः:
अतः:

AB² = BC × BD ...(i)

पुनः:△CAD और △CBA में,
चूँकि:∠CDA = ∠CAB = 90°
और:∠ACD = ∠BCA
अतः:

△CAD ~ △CBA [AA समरूपता]

अतः:
अतः:

AC² = BC × DC ...(ii)

अब:

(i) और (ii) जोड़ने पर AB² + AC² = BC × BD + BC × DC।

अतः:AB² + AC² = BC(BD + DC) = BC × BC = BC²
निष्कर्ष:

BC² = AB² + AC² [सिद्ध हुआ]

📚 प्रमेय का सामान्य रूप

यदि c कर्ण और a, b अन्य दो भुजाएँ हों, तो:

c² = a² + b²

समकोण बनाने वाली अज्ञात भुजा के लिए:

अथवा

📚 ऐतिहासिक संदर्भ: बौधायन

प्राचीन भारत के शुल्बसूत्रों (Sulbasutras) में पाइथागोरस संबंध का उपयोग मिलता है। बौधायन शुल्बसूत्र की चर्चा में एक उल्लेखनीय नियम है: किसी वर्ग के विकर्ण पर बने वर्ग का क्षेत्रफल मूल वर्ग के क्षेत्रफल का दोगुना होता है। यह पाइथागोरस संबंध का एक विशेष रूप है।

स्रोत: University of St Andrews, MacTutor: The Indian Sulbasutras।

⭐ पाइथागोरस प्रमेय का विलोम

यदि त्रिभुज की एक भुजा पर बने वर्ग का क्षेत्रफल अन्य दो भुजाओं पर बने वर्गों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर हो, तो पहली भुजा के सामने का कोण समकोण होगा।

पाइथागोरस प्रमेय का विलोम

पाइथागोरस प्रमेय का विलोम

दिया है:

△ABC में AB² = AC² + BC²।

सिद्ध करना है:∠ACB = 90°
रचना:

FE = CB लें। F पर FE के लंब रेखा खींचें और उस पर FD = AC लें। D और E को मिलाएँ।

प्रमाण:

दिया है AB² = BC² + AC²। साथ ही EF = BC, DF = AC।

अतः:AB² = EF² + DF²
परंतु:

DF ⟂ FE होने से △DFE समकोण त्रिभुज है। पाइथागोरस प्रमेय से DE² = DF² + EF²।

अतः:

AB² = DE²। दोनों लंबाइयाँ धनात्मक हैं, इसलिए AB = DE।

अब:

△ABC और △DEF में AB = DE, BC = EF, AC = DF।

अतः:

△ABC ≅ △DEF [SSS सर्वांगसमता]

अतः:∠ACB = ∠DFE
परंतु:∠DFE = 90°
निष्कर्ष:

∠ACB = 90° [सिद्ध हुआ]

📚 विलोम प्रमेय से समकोण त्रिभुज की पहचान

तीन लंबाइयाँ दी हों, तो पहले जाँचें कि वे धनात्मक हैं और छोटी दो लंबाइयों का योग सबसे बड़ी से अधिक है। तभी उनसे त्रिभुज बन सकता है। सभी लंबाइयाँ एक ही इकाई में लें।

मान लें सबसे लंबी भुजा c और अन्य दो भुजाएँ a, b हैं। जाँचें कि c² = a² + b² है या नहीं। यदि यह समानता सही है, तो c के सामने का कोण 90° है और त्रिभुज समकोण है।

उदाहरण: 5, 12, 13

13² = 169 5² + 12² = 25 + 144 = 169

अतः 13² = 5² + 12²। विलोम प्रमेय से त्रिभुज समकोण है और 13 इकाई वाली भुजा कर्ण है।

📚 पाइथागोरस त्रिक (Pythagorean Triples)

तीन धनात्मक पूर्णांक a, b, c यदि a² + b² = c² को संतुष्ट करते हैं, तो वे पाइथागोरस त्रिक (Pythagorean Triple) बनाते हैं।

त्रिक बनाने का सूत्र और प्रमाण

मान लें m और n धनात्मक पूर्णांक हैं तथा m > n। लें:

a = m² − n², b = 2mn, c = m² + n²

तीनों संख्याएँ धनात्मक पूर्णांक हैं। साथ ही:

इनसे त्रिभुज भी बन सकता है, क्योंकि c सबसे बड़ी संख्या है और

अर्थात a + b > c। पाइथागोरस प्रमेय के विलोम से त्रिभुज समकोण है और उसका कर्ण m² + n² है।

याद रखें: केवल m > n कहना पर्याप्त नहीं है। इस सूत्र से त्रिक बनाने के लिए m और n धनात्मक पूर्णांक होने चाहिए।

उदाहरण

m = 2, n = 1 लेने पर:

m² − n² = 3, 2mn = 4, m² + n² = 5

अतः 3, 4, 5 एक पाइथागोरस त्रिक है।

उदाहरण

m = 3, n = 2 लेने पर:

m² − n² = 5, 2mn = 12, m² + n² = 13

अतः 5, 12, 13 एक और पाइथागोरस त्रिक है।

⚠️ सामान्य गलतियाँ

❌ हर त्रिभुज में a² + b² = c² लगाना।
✔✔ पाइथागोरस प्रमेय सीधे केवल समकोण त्रिभुज पर लागू होता है।

❌ किसी भी भुजा को c मान लेना।
✔✔ यहाँ c समकोण के सामने की भुजा, अर्थात कर्ण होना चाहिए।

❌ समकोण बनाने वाली अज्ञात भुजा निकालते समय वर्गों को जोड़ना।
✔✔ अज्ञात भुजा का वर्ग = कर्ण का वर्ग − समकोण बनाने वाली दूसरी भुजा का वर्ग।

❌ सबसे छोटी भुजा के वर्ग की तुलना अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग से करना।
✔✔ विलोम प्रमेय की जाँच में सबसे लंबी भुजा के वर्ग की तुलना बाकी दो भुजाओं के वर्गों के योग से करें।

❌ 5² + 12² = 13² को केवल संख्याओं का मेल मानना।
✔✔ पाइथागोरस प्रमेय के विलोम का उपयोग करके निष्कर्ष निकालें कि त्रिभुज समकोण है।

🧠 याद रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बातें

👉 कर्ण समकोण के सामने की और सबसे लंबी भुजा है।

👉 यदि ∠A = 90°, तो BC² = AB² + AC²।

👉 सामान्य रूप: c² = a² + b²।

👉 अज्ञात कर्ण: c = √(a² + b²)।

👉 समकोण बनाने वाली अज्ञात भुजा: a = √(c² − b²) या b = √(c² − a²)।

👉 विलोम: c² = a² + b² होने पर c के सामने का कोण समकोण है।

👉 3, 4, 5 और 5, 12, 13 पाइथागोरस त्रिक के सरल उदाहरण हैं।

👉 (m² − n²), 2mn, (m² + n²) से पाइथागोरस त्रिक मिलता है, जहाँ m और n धनात्मक पूर्णांक हैं तथा m > n।