स्थिर विद्युत (Static Electricity)
सूखे बालों में प्लास्टिक की कंघी रगड़कर छोटे कागज़ के टुकड़ों के पास लाने पर वे कंघी की ओर आकर्षित हो सकते हैं। सर्दियों में सिंथेटिक कपड़े उतारते समय हल्की चरचराहट या छोटी चिंगारी भी दिखाई दे सकती है। इन घटनाओं के पीछे स्थिर विद्युत (Static Electricity) होती है।
Class 10 के विद्युत अध्याय को अच्छी तरह समझने के लिए स्थिर आवेश, आवेश का स्थानांतरण और आवेशों के बीच कार्य करने वाले बल की स्पष्ट समझ आवश्यक है।
👉 स्थिर विद्युत क्या है?
जब किसी वस्तु पर धनात्मक या ऋणात्मक विद्युत आवेश का असंतुलन बनकर वह आवेश कुछ समय तक संचित रहता है, तो इसे स्थिर विद्युत कहते हैं।
यहाँ “स्थिर” का अर्थ यह नहीं कि आवेश कभी चल नहीं सकता। इसका अर्थ है कि आवेश किसी बंद परिपथ में लगातार विद्युत धारा के रूप में प्रवाहित नहीं हो रहा। उचित मार्ग मिलने पर संचित आवेश तेजी से निर्वहन (discharge) हो सकता है।
उदाहरण: रगड़ी हुई कंघी, गुब्बारा, प्लास्टिक स्केल या सिंथेटिक कपड़े पर कुछ समय के लिए स्थिर आवेश जमा रह सकता है।
👉 कोई वस्तु आवेशित कैसे होती है?
सामान्य अवस्था में कोई वस्तु लगभग विद्युत-उदासीन होती है, अर्थात उसके कुल धनात्मक और ऋणात्मक आवेश एक-दूसरे को संतुलित करते हैं। जब किसी प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉन एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित होते हैं, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है।
- वस्तु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है तो ऋणावेशित होती है।
- वस्तु इलेक्ट्रॉन खोती है तो धनावेशित होती है।
महत्वपूर्ण
सामान्य स्थिर विद्युत घटनाओं में प्रोटॉन वस्तुओं के बीच स्थानांतरित नहीं होते। मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है।
👉 आवेश का संरक्षण
दो वस्तुओं को रगड़ने पर यदि एक वस्तु कुछ इलेक्ट्रॉन खोती है, तो दूसरी वही इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकती है। फलस्वरूप एक वस्तु पर धनात्मक और दूसरी पर समान परिमाण का ऋणात्मक आवेश दिखाई देता है।
अर्थात नया आवेश उत्पन्न नहीं होता; आवेश एक वस्तु से दूसरी में स्थानांतरित होता है और कुल आवेश संरक्षित रहता है।
यह आवेश संरक्षण का नियम (Conservation of Charge) का सरल उदाहरण है।
👉 आवेशों की पारस्परिक क्रिया
विद्युत आवेश दो प्रकार के होते हैं: धनात्मक और ऋणात्मक।
| आवेश की प्रकृति | पारस्परिक क्रिया |
|---|---|
| समान आवेश (+,+ या −,−) | एक-दूसरे को विकर्षित करते हैं |
| विपरीत आवेश (+,−) | एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं |
इस आकर्षण या विकर्षण बल की मात्रा कूलॉम के नियम से ज्ञात की जाती है।
👉 किसी वस्तु को आवेशित करने की मुख्य विधियाँ
किसी वस्तु को मुख्यतः तीन तरीकों से आवेशित किया जा सकता है।
1. घर्षण द्वारा (Charging by Friction)
दो अलग पदार्थों को रगड़ने पर उनके बीच इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित हो सकते हैं। एक वस्तु इलेक्ट्रॉन खोकर धनावेशित और दूसरी इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणावेशित हो जाती है।
उदाहरण: सूखे बालों में प्लास्टिक की कंघी या गुब्बारा रगड़ने पर वह छोटे कागज़ के टुकड़े आकर्षित कर सकता है।
याद रखें: घर्षण स्वयं आवेश “बनाता” नहीं है; यह इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण का अवसर देता है।
2. संपर्क द्वारा (Charging by Contact / Conduction)
किसी आवेशित चालक को उदासीन चालक से स्पर्श कराने पर आवेश उनके बीच पुनर्वितरित हो सकता है। अलग करने के बाद पहले उदासीन चालक पर भी आवेश रह सकता है।
3. प्रेरण द्वारा (Charging by Induction)
किसी आवेशित वस्तु को बिना स्पर्श किए उदासीन चालक के बहुत पास लाने पर चालक के भीतर आवेश पुनर्व्यवस्थित हो जाते हैं। इसे विद्युत स्थैतिक प्रेरण (Electrostatic Induction) कहते हैं।
उचित अर्थिंग के साथ प्रेरण द्वारा चालक को स्थायी रूप से आवेशित भी किया जा सकता है।
👉 चालक और अचालक में स्थिर आवेश का व्यवहार
| विषय | चालक (Conductor) | अचालक (Insulator) |
|---|---|---|
| आवेश की गति | आवेश वाहक अपेक्षाकृत आसानी से चल सकते हैं | आवेश वाहकों की गति बहुत सीमित होती है |
| स्थिर आवेश | सतह पर तेजी से पुनर्वितरित हो सकता है | स्थानीय रूप से अधिक समय तक फँसा रह सकता है |
| उदाहरण | ताँबा, एल्युमिनियम, लोहा | काँच, रबर, सूखा प्लास्टिक |
इसी कारण प्लास्टिक की कंघी या गुब्बारे पर स्थिर आवेश आसानी से देखा जाता है, विशेषकर सूखे मौसम में।
👉 विद्युत स्थैतिक प्रेरण को सरल तरीके से समझें
मान लें एक धनावेशित छड़ को उदासीन धातु चालक के पास लाया गया। छड़ के आकर्षण से चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉन पास वाले सिरे की ओर अधिक एकत्र होते हैं। इसलिए पास का सिरा तुलनात्मक रूप से ऋणात्मक और दूर का सिरा तुलनात्मक रूप से धनात्मक हो जाता है।
छड़ ने चालक को छुआ नहीं, फिर भी चालक के भीतर आवेश का पुनर्विन्यास हुआ। यही विद्युत स्थैतिक प्रेरण है।
यह अवधारणा महत्वपूर्ण है क्योंकि कोई आवेशित वस्तु कभी-कभी उदासीन वस्तु को भी आकर्षित कर सकती है।
👉 अर्थिंग (Earthing)
पृथ्वी को एक बहुत बड़े आवेश भंडार की तरह माना जा सकता है। किसी चालक को चालक तार से पृथ्वी से जोड़ने पर इलेक्ट्रॉन पृथ्वी में जा सकते हैं या पृथ्वी से आ सकते हैं। इस संपर्क को अर्थिंग कहते हैं।
अर्थिंग अतिरिक्त आवेश के लिए सुरक्षित मार्ग बनाती है।
दैनिक उपयोग: विद्युत उपकरणों की धातु की बाहरी परत को अर्थ करना सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, यद्यपि इसे धारा विद्युत और घरेलू परिपथ में अधिक विस्तार से पढ़ा जाता है।
👉 इलेक्ट्रोस्कोप (Electroscope)
किसी वस्तु पर आवेश है या नहीं, यह जाँचने के लिए विद्युतदर्शी (Electroscope) उपयोग किया जा सकता है। पारंपरिक gold-leaf electroscope में पतली धातु पत्तियाँ समान आवेश मिलने पर विकर्षण के कारण अलग हो जाती हैं।
यह स्थिर आवेश पहचानने का एक प्रारंभिक उपकरण है।
👉 कूलॉम का नियम (Coulomb's Law)
दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच विद्युत स्थैतिक बल का परिमाण:
- दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के समानुपाती है,
- उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती है,
- और दोनों आवेशों को जोड़ने वाली सीधी रेखा के अनुदिश कार्य करता है।
अतः,
और,
इसलिए,
या,
जहाँ,
- = दोनों आवेशों के बीच विद्युत बल,
- = दोनों आवेशों के परिमाण,
- = दोनों आवेशों के बीच दूरी,
- = माध्यम पर निर्भर समानुपाती नियतांक।
बल आकर्षण है या विकर्षण?
- समान आवेशों के लिए बल विकर्षणात्मक होता है।
- विपरीत आवेशों के लिए बल आकर्षणात्मक होता है।
सूत्र में लेने पर बल का परिमाण मिलता है। बल का प्रकार आवेशों के चिह्न से तय किया जाता है।
👉 निर्वात में कूलॉम का नियम
निर्वात में,
अतः,
जहाँ निर्वात की विद्युतशीलता (permittivity of free space) है।
लगभग,
इसलिए निर्वात या लगभग वायु में कई प्रश्नों के लिए,
का उपयोग किया जा सकता है।
👉 किसी माध्यम में कूलॉम का नियम
यदि माध्यम की विद्युतशीलता है, तो
यदि माध्यम की सापेक्ष विद्युतशीलता या dielectric constant है, तो
अर्थात,
इसलिए समान दो आवेश और समान दूरी के लिए,
अर्थात सापेक्ष विद्युतशीलता जितनी अधिक होगी, समान परिस्थितियों में दो आवेशों के बीच कूलॉम बल उतना कम होगा।
नोट: कई पुराने पाठ्यपुस्तकों में सापेक्ष विद्युतशीलता या dielectric constant को से दर्शाया जाता है। आधुनिक लेखन में भी प्रचलित है।
👉 कूलॉम के नियम से महत्वपूर्ण परिणाम
1. एक आवेश दोगुना करने पर
अन्य सभी राशियाँ अपरिवर्तित रहें तो,
अतः एक आवेश दोगुना करने पर बल भी दोगुना हो जाता है।
2. दोनों आवेश दोगुने करने पर
अर्थात बल चार गुना हो जाता है।
3. दूरी दोगुनी करने पर
अर्थात बल पहले का एक-चौथाई हो जाता है।
4. दूरी तीन गुनी करने पर
अर्थात बल पहले का एक-नौवाँ भाग हो जाता है।
👉 विद्युत आवेश की इकाई
विद्युत आवेश की SI इकाई कूलॉम (coulomb) है, प्रतीक C।
मूल आवेश का परिमाण,
आवेश का विमीय सूत्र,
अतिरिक्त जानकारी
CGS-ESU पद्धति में आवेश की इकाई statcoulomb (statC) है। लगभग,
Class 10 के अधिकांश संख्यात्मक प्रश्नों में SI इकाइयों का उपयोग अधिक सुविधाजनक है।
👉 हल किया गया उदाहरण 1
दो बिंदु आवेश और निर्वात में दूरी पर हैं। उनके बीच बल का परिमाण ज्ञात करें।
दिया है,
कूलॉम के नियम से,
अतः बल का परिमाण 0.6 N है। आवेश समान प्रकार के हों तो बल विकर्षणात्मक और विपरीत हों तो आकर्षणात्मक होगा।
👉 हल किया गया उदाहरण 2
दो आवेशों के बीच बल 16 N है। उनकी दूरी दोगुनी कर दी जाए तो नया बल कितना होगा?
कूलॉम के नियम के अनुसार,
दूरी दोगुनी होने पर,
अतः नया बल 4 N है।
👉 हल किया गया उदाहरण 3
निर्वात में दो आवेशों के बीच बल 12 N है। यदि समान दूरी पर उन्हें सापेक्ष विद्युतशीलता वाले माध्यम में रखा जाए, तो बल कितना होगा?
अतः माध्यम में बल 4 N है।
👉 स्थिर विद्युत और धारा विद्युत में अंतर
| स्थिर विद्युत | धारा विद्युत |
|---|---|
| आवेश किसी वस्तु पर संचित रहता है | आवेश वाहकों का व्यवस्थित प्रवाह होता है |
| आमतौर पर घर्षण, संपर्क या प्रेरण में दिखाई देता है | आमतौर पर विभवांतर वाले बंद परिपथ में दिखाई देता है |
| अचानक निर्वहन (discharge) हो सकता है | परिपथ में लगातार प्रवाहित हो सकता है |
| उदाहरण: रगड़ी हुई कंघी, गुब्बारा | उदाहरण: बैटरी से चलने वाला परिपथ |
👉 दैनिक जीवन में स्थिर विद्युत
⭐ कंघी और कागज़: बालों में रगड़ी गई प्लास्टिक कंघी छोटे कागज़ के टुकड़ों को आकर्षित कर सकती है।
⭐ गुब्बारा और बाल: गुब्बारे को बालों में रगड़ने पर बालों की कुछ लटें गुब्बारे की ओर उठ सकती हैं।
⭐ सिंथेटिक कपड़े: सूखे मौसम में कपड़े उतारते समय हल्की चरचराहट या छोटी चिंगारी हो सकती है।
⭐ कार या धातु का दरवाज़ा छूते समय झटका: शरीर पर संचित स्थिर आवेश अचानक निर्वहन होने पर छोटा झटका महसूस हो सकता है।
⭐ बिजली चमकना: बादलों में बड़े पैमाने पर आवेश-विभाजन होने पर विशाल विद्युत निर्वहन हो सकता है। यह स्थिर विद्युत का बड़ा प्राकृतिक उदाहरण है।
👉 आर्द्र दिनों में स्थिर विद्युत कम क्यों दिखाई देती है?
सूखी हवा अपेक्षाकृत अच्छे अचालक की तरह व्यवहार करती है, इसलिए वस्तु पर संचित आवेश कुछ समय बना रह सकता है। आर्द्र हवा में सतह पर पतली नमी की परत बन सकती है, जिससे आवेश धीरे-धीरे बाहर निकल जाता है।
इसलिए सूखी सर्दियों में स्थिर विद्युत झटका (static shock) अधिक महसूस हो सकता है, जबकि आर्द्र दिनों में कम।
👉 स्वयं प्रयास करें (Quick Practice)
- घर्षण से वस्तु आवेशित होने पर हम क्यों कहते हैं कि नया आवेश उत्पन्न नहीं होता?
- एक ऋणावेशित छड़ को उदासीन धातु गोले के पास लाया जाए तो गोले के आवेश कैसे पुनर्व्यवस्थित होंगे?
- दो आवेशों के बीच बल 20 N है। दूरी तीन गुनी करने पर नया बल कितना होगा?
- एक आवेश दोगुना और दूसरा तीन गुना करने पर, दूरी समान रहे तो बल कितने गुना होगा?
- निर्वात में दो आवेशों के बीच बल 18 N है। सापेक्ष विद्युतशीलता 6 वाले माध्यम में बल कितना होगा?
- समान और विपरीत आवेशों के लिए कूलॉम बल का प्रकार क्या होता है?
Exam tip: कूलॉम के नियम के संख्यात्मक प्रश्नों में पहले microcoulomb या nanocoulomb को coulomb में और दूरी को metre में बदलें। फिर का उपयोग करें।
👉 सामान्य गलतियाँ
- “स्थिर विद्युत में आवेश बिल्कुल नहीं चलता।” उचित मार्ग मिलने पर संचित आवेश पुनर्व्यवस्थित या निर्वहन हो सकता है।
- “घर्षण नया आवेश बनाता है।” सामान्यतः इलेक्ट्रॉन एक वस्तु से दूसरी में स्थानांतरित होते हैं; कुल आवेश संरक्षित रहता है।
- “आवेशित वस्तु केवल दूसरी आवेशित वस्तु को आकर्षित करती है।” प्रेरण के कारण आवेशित वस्तु उदासीन वस्तु को भी आकर्षित कर सकती है।
- “दूरी दोगुनी करने पर बल आधा हो जाता है।” कूलॉम बल के समानुपाती है, इसलिए दूरी दोगुनी करने पर बल एक-चौथाई हो जाता है।
- “माध्यम बदलने पर कूलॉम बल नहीं बदलता।” बल माध्यम की विद्युतशीलता पर निर्भर करता है।
- “q₁q₂ के चिह्न से ही बल का परिमाण लिखना चाहिए।” बल के परिमाण के लिए लेना सुविधाजनक है; आकर्षण या विकर्षण अलग से चिह्न देखकर तय करें।
👉 संक्षेप में याद रखें
- स्थिर विद्युत किसी वस्तु पर संचित शुद्ध विद्युत आवेश से संबंधित घटना है।
- वस्तुएँ सामान्यतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण या त्याग करके आवेशित होती हैं।
- कुल आवेश संरक्षित रहता है।
- समान आवेश विकर्षित और विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं।
- घर्षण, संपर्क और प्रेरण द्वारा वस्तु को आवेशित किया जा सकता है।
- अर्थिंग अतिरिक्त आवेश के लिए पृथ्वी तक चालक मार्ग बनाती है।
- कूलॉम का नियम: ।
- निर्वात में ।
- दूरी दोगुनी होने पर कूलॉम बल एक-चौथाई हो जाता है।
- सापेक्ष विद्युतशीलता बढ़ने पर समान दो आवेशों के बीच बल कम होता है।
- विद्युत आवेश की SI इकाई कूलॉम (C) है।