क्रांतिक कोण और प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Critical Angle & Total Internal Reflection)
क्रांतिक कोण (Critical Angle)
जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में अपवर्तित होती है, तब सघन माध्यम में एक विशेष आपतन कोण के लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90° हो जाता है। इस स्थिति में अपवर्तित किरण दोनों माध्यमों के सीमा-पृष्ठ के साथ-साथ चलती है। सघन माध्यम में इस विशेष आपतन कोण को उन दोनों माध्यमों का क्रांतिक कोण कहते हैं।
प्रकाश किरण का क्रांतिक कोण
Critical Angle of Light
क्रांतिक कोण का सूत्र:
यदि प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और सघन माध्यम का विरल माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक μ हो, तो
यहाँ,
C = क्रांतिक कोण
μ = सघन माध्यम का विरल माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक
क्रांतिक कोण की आवश्यक शर्तें:
⭐ प्रकाश किरण को सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाना चाहिए और दोनों माध्यमों के सीमा-पृष्ठ पर तिरछे आपतित होना चाहिए।
⭐ विरल माध्यम में अपवर्तन कोण का मान 90° होना चाहिए।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection)
जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाते समय दोनों माध्यमों के सीमा-पृष्ठ पर क्रांतिक कोण से अधिक आपतन कोण (i > ic) से आपतित होती है, तब प्रकाश विरल माध्यम में अपवर्तित नहीं होता। इसके बजाय लगभग पूरी प्रकाश ऊर्जा वापस सघन माध्यम में परावर्तित हो जाती है। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन
Total Internal Reflection of Light
पूर्ण आंतरिक परावर्तन की आवश्यक शर्तें:
⭐ प्रकाश किरण को सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाना चाहिए और सीमा-पृष्ठ पर तिरछे आपतित होना चाहिए।
⭐ सघन माध्यम में आपतन कोण, उन दोनों माध्यमों के क्रांतिक कोण से बड़ा होना चाहिए।
सामान्य परावर्तन और पूर्ण आंतरिक परावर्तन में अंतर:
| सामान्य परावर्तन | पूर्ण आंतरिक परावर्तन |
|---|---|
प्रकाश किसी माध्यम से दूसरे माध्यम के सीमा-पृष्ठ पर आने पर सामान्य परावर्तन हो सकता है। | पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए प्रकाश का सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाना आवश्यक है। |
| सामान्य परावर्तन किसी भी आपतन कोण पर हो सकता है। | पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा होना आवश्यक है। |
सामान्य परावर्तन में आपतित प्रकाश का एक भाग परावर्तित हो सकता है और दूसरा भाग दूसरे माध्यम में अपवर्तित या अवशोषित हो सकता है। इसलिए परावर्तित प्रकाश की तीव्रता अपेक्षाकृत कम हो सकती है। | पूर्ण आंतरिक परावर्तन में आदर्श स्थिति में लगभग पूरा प्रकाश सघन माध्यम में वापस परावर्तित हो जाता है और विरल माध्यम में कोई अपवर्तित किरण प्रवेश नहीं करती। इसलिए परावर्तित प्रकाश बहुत अधिक तीव्र हो सकता है। |
सामान्य परावर्तन में किसी परावर्तक पृष्ठ का उपयोग किया जा सकता है। | पूर्ण आंतरिक परावर्तन में दो पारदर्शी माध्यमों का सीमा-पृष्ठ ही परावर्तक पृष्ठ की तरह कार्य करता है। |
पूर्ण आंतरिक परावर्तन के उदाहरण:
⭐ हीरे की चमक
⭐ ऑप्टिकल फाइबर में प्रकाश का संचरण
⭐ मरीचिका
⭐ प्रिज्म में प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन
⭐ जल के भीतर से सतह की ओर देखने पर कुछ दिशाओं में दर्पण-जैसा प्रभाव
🧠 याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
🔹 क्रांतिक कोण केवल तब परिभाषित होता है जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाता है।
🔹 क्रांतिक कोण पर अपवर्तन कोण 90° होता है।
🔹 यदि i < C, तो प्रकाश विरल माध्यम में अपवर्तित होता है।
🔹 यदि i = C, तो अपवर्तित किरण सीमा-पृष्ठ के साथ चलती है।
🔹 यदि i > C, तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है।
🔹 किसी माध्यम का अपवर्तनांक जितना अधिक होता है, सामान्यतः उसका क्रांतिक कोण उतना ही कम होता है।
🔹 ऑप्टिकल फाइबर में प्रकाश को बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन द्वारा आगे पहुँचाया जाता है।
💡 सामान्य गलत धारणाएँ
| गलत धारणा | सही अवधारणा |
|---|---|
| पूर्ण आंतरिक परावर्तन किसी भी दो माध्यमों के बीच हो सकता है। | यह तभी होता है जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जा रहा हो। |
आपतन कोण क्रांतिक कोण के बराबर होने पर पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है। | क्रांतिक कोण पर अपवर्तन कोण 90° होता है। पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा होना चाहिए। |
पूर्ण आंतरिक परावर्तन में कुछ प्रकाश विरल माध्यम में जरूर जाता है। | आदर्श स्थिति में कोई अपवर्तित किरण विरल माध्यम में प्रवेश नहीं करती और प्रकाश सघन माध्यम में वापस परावर्तित हो जाता है। |
| क्रांतिक कोण केवल माध्यम की मोटाई पर निर्भर करता है। | क्रांतिक कोण मुख्य रूप से संबंधित दोनों माध्यमों के अपवर्तनांकों पर निर्भर करता है। |
💡 प्रश्नोत्तर (FAQ)
जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है, तब सघन माध्यम में वह आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90° हो जाता है, उन दोनों माध्यमों के लिए क्रांतिक कोण कहलाता है।
जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाते समय क्रांतिक कोण से अधिक आपतन कोण पर सीमा-पृष्ठ से टकराता है और विरल माध्यम में प्रवेश किए बिना पूरी तरह सघन माध्यम में वापस परावर्तित हो जाता है, तो इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
पहली, प्रकाश को सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाना चाहिए। दूसरी, सघन माध्यम में आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा होना चाहिए।
यदि सघन माध्यम का विरल माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक μ हो, तो ।
क्रांतिक कोण पर अपवर्तन कोण का मान 90° होता है।
ऑप्टिकल फाइबर में प्रकाश का संचरण पूर्ण आंतरिक परावर्तन का एक महत्वपूर्ण उपयोग है।