प्रकाशिकी की मूल अवधारणाएँ (Basic Concepts of Light)

प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है। प्रकाश-स्रोत से उत्सर्जित यह विकिरण ऊर्जा हमारी आँखों में जिसके कारण हम वस्तुओं को देख पाते हैं उत्पन्न करती है।

क्वांटम सिद्धांत के अनुसार प्रकाश में कण और तरंग, दोनों प्रकार के गुण पाए जाते हैं।

प्रकाश के कण को फोटॉन (Photon) कहा जाता है।

प्रकाश एक अनुप्रस्थ विद्युतचुंबकीय तरंग है। निर्वात में इसकी चाल सर्वाधिक होती है और इसका मान लगभग होता है। माध्यम बदलने पर प्रकाश की चाल भी बदल जाती है।

लगभग 4000Å से 8000Å तरंगदैर्ध्य वाला प्रकाश हमारी आँखों में दृष्टि-अनुभूति उत्पन्न कर सकता है। इस दृश्य प्रकाश की आवृत्ति लगभग से के बीच होती है।

जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है, तब उसकी चाल और तरंगदैर्ध्य बदल सकते हैं, लेकिन उसकी आवृत्ति नहीं बदलती।

प्रकाशिकी के दो मुख्य भाग

प्रकाशिकी के दो मुख्य भाग

ज्यामितीय प्रकाशिकी

भौतिक प्रकाशिकी

ज्यामितीय प्रकाशिकी (Geometrical Optics) : इस भाग में प्रकाश को किरण या सीधी रेखा के रूप में माना जाता है और उसके ज्यामितीय गुणों का अध्ययन किया जाता है। जैसे — परावर्तन, अपवर्तन, वर्ण-विक्षेपण आदि।

भौतिक प्रकाशिकी (Physical Optics) : इस भाग में प्रकाश की तरंग-प्रकृति और उससे संबंधित घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। जैसे — व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण आदि।

ज्यामितीय प्रकाशिकी

प्रकाश-स्रोत : जिस वस्तु से स्वयं प्रकाश उत्सर्जित होता है, उसे प्रकाश-स्रोत कहते हैं। उदाहरण के लिए सूर्य, जलता हुआ बल्ब या मोमबत्ती की लौ।

बिंदु-स्रोत : जब किसी प्रकाश-स्रोत का आकार उसकी दूरी की तुलना में इतना छोटा हो कि उसे एक ज्यामितीय बिंदु माना जा सके, तब उसे बिंदु-स्रोत कहते हैं।

अदीप्त वस्तु : जिस वस्तु का अपना प्रकाश नहीं होता, लेकिन किसी प्रकाश-स्रोत से आने वाले प्रकाश को परावर्तित करके दिखाई देती है, उसे अदीप्त वस्तु कहते हैं।

प्रकाशीय माध्यम : जिस माध्यम से प्रकाश का संचरण हो सकता है, उसे प्रकाशीय माध्यम कहते हैं।

समांगी माध्यम : जिस प्रकाशीय माध्यम में किसी निश्चित अवस्था में प्रकाश की चाल प्रत्येक दिशा में समान रहती है, उसे समांगी माध्यम कहते हैं।

असमांगी माध्यम : जिस माध्यम में प्रकाश की चाल स्थान या दिशा के अनुसार बदल सकती है, उसे असमांगी माध्यम कहते हैं।

अपारदर्शी माध्यम : जिस माध्यम से प्रकाश नहीं गुजर सकता, उसे अपारदर्शी माध्यम कहते हैं।

पारभासी माध्यम : जिस माध्यम से प्रकाश केवल आंशिक रूप से गुजर सकता है, उसे पारभासी या अर्धपारदर्शी माध्यम कहते हैं।

💡 पारदर्शी, अर्धपारदर्शी और अपारदर्शी माध्यमों की तुलना

माध्यम का प्रकारअर्थउदाहरण
पारदर्शी माध्यमजिसमें से प्रकाश आसानी से गुजर सकता हैकाँच, स्वच्छ जल
अर्धपारदर्शी माध्यमजिसमें से प्रकाश केवल आंशिक रूप से गुजर सकता हैधुँधला काँच, तेल लगा कागज
अपारदर्शी माध्यमजिसमें से प्रकाश नहीं गुजर सकतालकड़ी, लोहा, दीवार

समांगी और पारदर्शी माध्यम में प्रकाश किरण सीधी रेखा में चलती है।

प्रकाश किरण: प्रकाश जिस पथ पर चलता है, उस पथ को दर्शाने के लिए खींची गई सरल रेखा को प्रकाश किरण (Ray of Light) कहते हैं।

प्रकाश किरण

प्रकाश किरण

Ray of Light

प्रकाश किरण-पुंज: प्रकाश के प्रसार की दिशा में खींची गई अनेक प्रकाश किरणों के समूह को प्रकाश किरण-पुंज (Beam of Light) कहते हैं।

समांतर किरण-पुंज

समांतर किरण-पुंज

Parallel Beam of Light

अभिसारी किरण-पुंज

अभिसारी किरण-पुंज

Convergent Beam of Light

अपसारी किरण-पुंज

अपसारी किरण-पुंज

Divergent Beam of Light

समांतर किरण-पुंज: वे प्रकाश किरणें जो एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं और आपस में नहीं मिलतीं, समांतर किरण-पुंज कहलाती हैं।

अभिसारी किरण-पुंज: वे प्रकाश किरणें जो आगे बढ़ते हुए किसी एक निश्चित बिंदु की ओर मिलती हैं, अभिसारी किरण-पुंज कहलाती हैं।

अपसारी किरण-पुंज: वे प्रकाश किरणें जो किसी एक बिंदु से निकलकर अलग-अलग दिशाओं में फैलती हैं, अपसारी किरण-पुंज कहलाती हैं।

📚 याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें

⭐ प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है।

⭐ प्रकाश हमारी आँखों में देखने की अनुभूति उत्पन्न करता है।

⭐ प्रकाश में कण तथा तरंग, दोनों प्रकार के गुण पाए जाते हैं।

⭐ प्रकाश के कण को फोटॉन (Photon) कहा जाता है।

⭐ निर्वात में प्रकाश की चाल लगभग 3 × 10⁸ m/s होती है।

⭐ दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य लगभग 400 nm से 800 nm तक होती है।

⭐ प्रकाश जब एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है, तो उसकी चाल और तरंगदैर्ध्य बदल जाते हैं, लेकिन आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है।

⭐ प्रकाश के अध्ययन को प्रकाशिकी (Optics) कहा जाता है।

⭐ प्रकाशिकी की दो प्रमुख शाखाएँ हैं: ज्यामितीय प्रकाशिकी और भौतिक प्रकाशिकी।

⭐ प्रकाश किरण प्रकाश के प्रसार की दिशा को दर्शाती है।

⭐ अनेक प्रकाश किरणों के समूह को प्रकाश किरण-पुंज कहा जाता है।

⭐ प्रकाश किरण-पुंज मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: समांतर, अभिसारी और अपसारी।

💡 सामान्य भ्रांतियाँ

गलत धारणासही धारणा
चंद्रमा स्वयं प्रकाश का स्रोत है।

चंद्रमा प्रकाश का स्रोत नहीं है। वह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है।

प्रकाश हमेशा एक ही चाल से चलता है।प्रकाश की चाल अलग-अलग माध्यमों में अलग-अलग होती है।
प्रकाश किरण और किरण-पुंज एक ही हैं।

प्रकाश किरण प्रकाश के एकल पथ को दर्शाती है, जबकि किरण-पुंज अनेक प्रकाश किरणों का समूह होता है।

प्रकाश के दूसरे माध्यम में प्रवेश करने पर उसकी आवृत्ति बदल जाती है।

आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है, जबकि चाल और तरंगदैर्ध्य बदल जाते हैं।
दिखाई देने वाली सभी वस्तुएँ स्वयंप्रकाशी होती हैं।

कई वस्तुएँ किसी अन्य प्रकाश स्रोत के प्रकाश को परावर्तित करके दिखाई देती हैं।

💡 अवधारणात्मक प्रश्न

दिन के प्रकाश में हम पुस्तक को क्यों देख पाते हैं?

चंद्रमा को अप्रदीप्त वस्तु क्यों कहा जाता है?

जब प्रकाश वायु से काँच में प्रवेश करता है, तो उसकी चाल में क्या परिवर्तन होता है?

प्रकाश किरण और प्रकाश किरण-पुंज में क्या अंतर है?

पृथ्वी तक पहुँचने वाली सूर्य की किरणों को लगभग समांतर किरण-पुंज क्यों माना जाता है?

💡 त्वरित प्रश्नोत्तर

प्रकाश क्या है?+

प्रकाश ऊर्जा का एक रूप है, जो किसी प्रकाश स्रोत से निकलकर हमारी आँखों में देखने की अनुभूति उत्पन्न करता है।

निर्वात में प्रकाश की चाल कितनी होती है?+

निर्वात में प्रकाश की चाल लगभग 3 × 10⁸ m/s होती है।

प्रकाशीय माध्यम किसे कहते हैं?+

जिस पारदर्शी माध्यम से प्रकाश का संचरण हो सकता है, उसे प्रकाशीय माध्यम कहते हैं।

प्रकाश किरण किसे कहते हैं?+

प्रकाश के प्रसार की दिशा को दर्शाने वाली सरल रेखा को प्रकाश किरण कहते हैं।

किरण-पुंज कितने प्रकार के होते हैं?+

सामान्यतः प्रकाश किरण-पुंज तीन प्रकार के होते हैं: समांतर किरण-पुंज, अभिसारी किरण-पुंज और अपसारी किरण-पुंज।