विद्युत धारा (Electric Current)

जिस प्रकार जल के कण किसी निश्चित दिशा में लगातार गति करते हैं तो जल का प्रवाह उत्पन्न होता है, उसी प्रकार जब इलेक्ट्रॉन या आयन जैसे आवेशित कण व्यवस्थित रूप से किसी निश्चित दिशा में गति करने लगते हैं, तब विद्युत धारा (Electric Current) उत्पन्न होती है।

धात्विक चालक में बहुत-से मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electrons) होते हैं। ये इलेक्ट्रॉन हमेशा अनियमित रूप से गति करते रहते हैं, लेकिन इस अनियमित गति से किसी एक निश्चित दिशा में शुद्ध विद्युत धारा उत्पन्न नहीं होती। जब चालक के दोनों सिरों के बीच विभवांतर (Potential Difference) उत्पन्न किया जाता है, तब मुक्त इलेक्ट्रॉनों में एक निर्देशित बहाव उत्पन्न होता है। परिणामस्वरूप चालक में विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है।

👉 विद्युत धारा की परिभाषा

किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट (cross-section) से प्रति इकाई समय में प्रवाहित होने वाले विद्युत आवेश की मात्रा को विद्युत धारा कहते हैं।

यदि समय t में Q आवेश प्रवाहित होता है, तो—

जहाँ,

  • I = विद्युत धारा
  • Q = चालक से प्रवाहित विद्युत आवेश
  • t = समय

अतः,

Q = It

विद्युत धारा एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है। धारा के प्रवाह की दिशा अवश्य होती है, लेकिन धाराओं का योग सदिश राशियों के नियमों के अनुसार नहीं किया जाता।

👉 विद्युत धारा की दिशा

जिस दिशा में धन आवेश गति करता, उसी दिशा को पारंपरिक विद्युत धारा (Conventional Current) की दिशा माना जाता है।

धात्विक चालकों में मुख्य गतिशील आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन होते हैं। इलेक्ट्रॉन ऋण आवेशित होते हैं, इसलिए उनकी गति की दिशा पारंपरिक विद्युत धारा की दिशा के विपरीत होती है।

याद रखें:

  • पारंपरिक धारा: उच्च विभव → निम्न विभव
  • इलेक्ट्रॉन प्रवाह: निम्न विभव → उच्च विभव

👉 विद्युत धारा का SI मात्रक

विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पियर (Ampere, A) है।

यदि किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित हो, तो विद्युत धारा 1 एम्पियर होती है।

1 A = 1 C/s

अतः,

1 C = 1 A × 1 s

✏️ उदाहरण 1

यदि 10 सेकंड में 20 कूलॉम आवेश प्रवाहित हो, तो विद्युत धारा ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 2 A

✏️ उदाहरण 2

5 A की धारा 5 मिनट तक प्रवाहित होती है। चालक से कुल कितना आवेश गुजरेगा?

उत्तर: 1500 C

👉 दिष्ट धारा और प्रत्यावर्ती धारा

📚 दिष्ट धारा (Direct Current, DC)

जो विद्युत धारा लगातार एक ही दिशा में प्रवाहित होती है, उसे दिष्ट धारा (DC) कहते हैं।

📚 प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current, AC)

जिस विद्युत धारा की दिशा निश्चित समयांतराल पर बार-बार बदलती रहती है, उसे प्रत्यावर्ती धारा (AC) कहते हैं।

इस अध्याय के आगे के भागों में विद्युत धारा, प्रतिरोध और ओम के नियम को समझाने के लिए मुख्यतः सरल DC परिपथों का उपयोग किया गया है।

👉 ओम का नियम (Ohm's Law)

जब किसी चालक का तापमान, पदार्थ और अन्य भौतिक अवस्थाएँ स्थिर रहती हैं, तब उसके सिरों के बीच विभवांतर उसमें प्रवाहित विद्युत धारा के सीधे समानुपाती होता है।

I ∝ V

या,

V ∝ I

यदि समानुपात का स्थिरांक R हो, तो—

V = IR

इस संबंध को ओम का नियम कहते हैं। यहाँ R चालक का विद्युत प्रतिरोध है।

ओम के नियम से—

और,

📚 इसका क्या अर्थ है?

समान विभवांतर पर अधिक प्रतिरोध होने से कम धारा प्रवाहित होती है, जबकि कम प्रतिरोध होने से अधिक धारा प्रवाहित होती है।

👉 प्रतिरोध का मात्रक

प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ω) है।

यदि किसी चालक के सिरों पर 1 वोल्ट का विभवांतर लगाने पर उसमें 1 एम्पियर धारा प्रवाहित हो, तो उस चालक का प्रतिरोध 1 ओम होता है।

इसके बड़े और छोटे मात्रक हैं:

प्रतिरोध की प्रकृति और यह किन कारकों पर निर्भर करता है, इसकी विस्तृत चर्चा Electrical Resistance and Resistivity पेज पर की गई है।

👉 ओमिक और नॉन-ओमिक चालक

📚 ओमिक चालक (Ohmic Conductor)

जो चालक निश्चित तापमान और निश्चित भौतिक अवस्थाओं में ओम के नियम का पालन करता है, उसे ओमिक चालक कहते हैं। कई धात्विक चालक उपयुक्त सीमा में ऐसा व्यवहार करते हैं।

📚 नॉन-ओमिक चालक (Non-ohmic Conductor)

जिस पदार्थ में V और I सीधे समानुपाती नहीं होते, उसे नॉन-ओमिक पदार्थ कहते हैं। सेमीकंडक्टर उपकरण इसके सामान्य उदाहरण हैं।

👉 V-I ग्राफ

किसी ओमिक चालक के लिए, यदि तापमान और अन्य भौतिक अवस्थाएँ स्थिर रहें, तो । इसलिए विभवांतर और धारा का ग्राफ मूलबिंदु से गुजरने वाली सीधी रेखा होता है।

नॉन-ओमिक पदार्थ के लिए ग्राफ मूलबिंदु से गुजरने वाली सीधी रेखा नहीं होता।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण: यदि आपको V-I ग्राफ दिया गया हो, तो सबसे पहले देखें कि वह मूलबिंदु से गुजरने वाली सीधी रेखा है या नहीं।

हल किए गए उदाहरण

✏️ उदाहरण 3

किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर 50 V है और उसका प्रतिरोध 10 Ω है। विद्युत धारा ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 5 A

✏️ उदाहरण 4

किसी चालक का प्रतिरोध 10 Ω है और उसमें 5 A धारा प्रवाहित होती है। विभवांतर ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 50 V

✏️ उदाहरण 5

किसी चालक के सिरों पर 10 V का विभवांतर लगाने पर उसमें 2 A धारा प्रवाहित होती है। उसका प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 5 Ω

✏️ उदाहरण 6

125 Ω प्रतिरोध वाला एक विद्युत बल्ब 250 V के स्रोत से जोड़ा गया है। उसमें प्रवाहित धारा ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 2 A

🧠 त्वरित पुनरावृत्ति

⭐ आवेश को Q, विद्युत धारा को I, समय को t, विभवांतर को V और प्रतिरोध को R से दर्शाया जाता है।

⭐ आवेश का SI मात्रक: कूलॉम (C); धारा का SI मात्रक: एम्पियर (A); विभवांतर का SI मात्रक: वोल्ट (V); प्रतिरोध का SI मात्रक: ओम (Ω)।

⭐ विद्युत धारा:

⭐ आवेश:

⭐ ओम का नियम:

⭐ प्रतिरोध:

⭐ विद्युत धारा:

⭐ 1 A = 1 C/s

⭐ 1 Ω = 1 V/A

⭐ धात्विक चालक में इलेक्ट्रॉन प्रवाह और पारंपरिक विद्युत धारा की दिशाएँ परस्पर विपरीत होती हैं।

✍ स्वयं हल करें

🔹 यदि 4 सेकंड में 12 C आवेश प्रवाहित हो, तो विद्युत धारा ज्ञात कीजिए।

🔹 3 A धारा 2 मिनट तक प्रवाहित होती है। कुल प्रवाहित आवेश ज्ञात कीजिए।

🔹 24 V विभवांतर पर 6 A धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

🔹 8 Ω प्रतिरोध से 2.5 A धारा प्रवाहित होती है। विभवांतर ज्ञात कीजिए।

🔹 दो प्रतिरोधों का अनुपात 2:3 है और दोनों को अलग-अलग समान विभवांतर से जोड़ा जाता है। उनमें प्रवाहित धाराओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।