प्रतिरोधों का संयोजन (Combination of Resistances)

एक ही विद्युत परिपथ में दो या दो से अधिक प्रतिरोधों को आपस में जोड़ने को प्रतिरोधों का संयोजन (Combination of Resistances) कहते हैं। परिपथ का प्रभावी या कुल प्रतिरोध इस बात पर निर्भर करता है कि प्रतिरोधों को किस प्रकार जोड़ा गया है।

प्रतिरोधों के संयोजन के दो मुख्य प्रकार हैं—

👉 श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination)

👉 समानांतर संयोजन (Parallel Combination)

👉 तुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance)

मान लें कि कई प्रतिरोधों के संयोजन को एक ऐसे एकल प्रतिरोध से बदल दिया जाए जिससे समान विभवांतर लगाने पर परिपथ की कुल धारा में कोई परिवर्तन न हो। इस एकल प्रतिरोध को मूल संयोजन का तुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance) कहते हैं।

तुल्य प्रतिरोध की सहायता से किसी जटिल resistor network को एक प्रभावी प्रतिरोध के रूप में दर्शाया जा सकता है।

👉 श्रेणीक्रम संयोजन (Series Combination)

जब प्रतिरोधों को एक के बाद एक इस प्रकार जोड़ा जाता है कि सभी प्रतिरोधों से समान विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उन्हें श्रेणीक्रम में जुड़ा हुआ कहते हैं।

यदि प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हों, तो तुल्य प्रतिरोध—

श्रेणीक्रम संयोजन की मुख्य विशेषताएँ

  • प्रत्येक प्रतिरोध से समान धारा प्रवाहित होती है।
  • तुल्य प्रतिरोध, संयोजन में उपस्थित किसी भी एकल प्रतिरोध से अधिक होता है।
  • श्रेणीक्रम में और प्रतिरोध जोड़ने पर कुल प्रतिरोध बढ़ता है।

समान प्रतिरोधों के लिए

यदि प्रत्येक प्रतिरोध का मान है और कुल प्रतिरोध हैं, तो—

👉 समानांतर संयोजन (Parallel Combination)

जब कई प्रतिरोधों के दोनों सिरों को परिपथ के समान दो बिंदुओं से जोड़ा जाता है, तो वे समानांतर जुड़े हुए कहलाते हैं।

इस व्यवस्था में प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवांतर समान होता है।

यदि प्रतिरोध समानांतर जुड़े हों, तो—

समानांतर संयोजन की मुख्य विशेषताएँ

  • प्रत्येक शाखा के सिरों के बीच विभवांतर समान होता है।
  • कुल विद्युत धारा अलग-अलग शाखाओं में विभाजित हो जाती है।
  • तुल्य प्रतिरोध, संयोजन के सबसे छोटे एकल प्रतिरोध से भी कम होता है।

👉 दो प्रतिरोधों का समानांतर संयोजन

यदि दो प्रतिरोध और समानांतर जुड़े हों, तो—

अतः,

👉 n समान प्रतिरोधों का समानांतर संयोजन

यदि प्रत्येक प्रतिरोध का मान हो, तो—

अतः,

Series और Parallel का अंतर

श्रेणीक्रम संयोजन (Series)समानांतर संयोजन (Parallel)
प्रत्येक प्रतिरोध से समान धारा प्रवाहित होती हैप्रत्येक शाखा के सिरों पर समान विभवांतर होता है
तुल्य प्रतिरोध बढ़ता हैतुल्य प्रतिरोध घटता है

n समान प्रतिरोधों के लिए:

n समान प्रतिरोधों के लिए:

👉 महत्वपूर्ण उदाहरण

✏️ उदाहरण 1: एक तार का कुल प्रतिरोध 10 Ω है। उसे दो बराबर भागों में काटकर दोनों भागों को समानांतर जोड़ा जाता है। तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

तार को दो बराबर भागों में काटने पर प्रत्येक भाग की लंबाई आधी हो जाती है। समान पदार्थ और समान अनुप्रस्थ क्षेत्रफल के लिए प्रतिरोध लंबाई के सीधे समानुपाती होता है। इसलिए प्रत्येक भाग का प्रतिरोध—

5 Ω के दो समान प्रतिरोध समानांतर जुड़े हैं, इसलिए—

उत्तर: 2.5 Ω

✏️ उदाहरण 2: श्रेणीक्रम संयोजन

2 Ω, 3 Ω और 5 Ω के प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं।

उत्तर: 10 Ω

✏️ उदाहरण 3: दो प्रतिरोध समानांतर में

6 Ω और 3 Ω के प्रतिरोध समानांतर जुड़े हैं।

उत्तर: 2 Ω

✏️ उदाहरण 4: तीन समान प्रतिरोध

12 Ω के तीन समान प्रतिरोध समानांतर जुड़े हैं।

उत्तर: 4 Ω

📚 समानांतर संयोजन महत्वपूर्ण क्यों है?

समानांतर संयोजन में प्रत्येक शाखा के सिरों के बीच समान विभवांतर प्राप्त होता है। इसी कारण घरेलू विद्युत परिपथों में विद्युत उपकरणों को सामान्यतः समानांतर जोड़ा जाता है।

🧠 त्वरित पुनरावृत्ति

⭐ Series:

⭐ Parallel:

⭐ n समान प्रतिरोध series में:

⭐ n समान प्रतिरोध parallel में:

⭐ दो प्रतिरोध parallel में:

✍ स्वयं हल करें

🔹 4 Ω, 6 Ω और 10 Ω को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

🔹 4 Ω और 12 Ω को समानांतर जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

🔹 8 Ω के चार समान प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

🔹 8 Ω के चार समान प्रतिरोध समानांतर जुड़े हैं। कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

🔹 अवधारणात्मक रूप से समझाइए कि समानांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे एकल प्रतिरोध से भी कम क्यों होता है।